लुधियाना। केंद्र सरकार की ओर से 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को मंजूरी मिलने पर कारोबारियों ने खुशी जताते हुए गुरुवार को कहा कि इससे देश में खेलों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, युवाओं को सेहतमंद रखने में मदद मिलेगी।समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डीएस चावला ने इस फैसले के लिए मोदी सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी मिलना बहुत ही सकारात्मक है। इससे देश में खेलों को बढ़ावा मिलेगा और युवा सेहतमंद होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि इस सेक्टर को काफी समय से लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है, लेकिन आज के मोबाइल दौर में इसे सपोर्ट करने से लोगों की सेहत में सकारात्मक बदलाव आएगा।

चावला ने कहा कि वह साइकिल इंडस्ट्री से हैं और साइकिल अपनेआप में एक बेस्ट एक्सरसाइज है। इससे पूरा शरीर क्रियान्वित होता है।

साइकिल इंडस्ट्री से जुड़े अन्य कारोबारी हरविंदर सिंह ने कहा कि विनिर्माण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई योजना एक अच्छा विचार है। लेकिन साइकिल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए, इस योजना का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए, ताकि छोटे व्यापारियों को भी इसका फायदा मिल सके। फिलहाल, छोटे व्यापारियों को ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। बड़े व्यापारी इसका फायदा उठा लेते हैं, जबकि छोटे व्यापारी ऐसा नहीं कर पाते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026 से 2033-34 की अवधि के लिए 1,856.67 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ खेलो इंडिया खेल उपकरण विनिर्माण योजना को मंजूरी दे दी थी। इस योजना का उद्देश्य निवेश, विनिर्माण, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देना तथा खेल उपकरण क्षेत्र में दुनिया भर में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।

इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। इसका लक्ष्य निवेश, प्रौद्योगिकी अंगीकार, अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विकास के लिए लक्षित सहायता के माध्यम से भारत के खेल उपकरण विनिर्माण आधार को मजबूत करना है। यह योजना विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेल उपकरण उद्योग के विकास को मदद करेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी।

खेलो भारत नीति 2025, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, इस योजना से निवेश आकर्षित होने, रोजगार के अवसर बढ़ने, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के मजबूत होने और भारतीय खेल उपकरणों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है।