भोपाल। 16वें वित्त आयोग द्वारा मध्यप्रदेश को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान की राशि में से कटौती सिफारिश की गई है। यह कटौती पांच साल में करीब पचास हजार करोड़ तक पहुंच सकती है। इससे प्रदेश के विकास कार्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर पड़ने की संभावना है।
आयोग की रिकमेंडेशन रिपोर्ट और फार्मूले के अनुसार, राज्य को केंद्रीय करों और जीएसटी के हिस्से के रूप में मिलने वाली अनुदान राशि में 0.5 प्रतिशत की कमी होगी। मालूम हो कि प्रदेश सरकार का वर्ष 2026-27 का बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये का है। राज्य को केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि में कमी आने की स्थिति में विशेष रूप से लोक निर्माण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार पर राज्य की नजर
अब राज्य सरकार की नजर केंद्र से मिलने वाले विशेष पैकेजों और अन्य केंद्रीय योजनाओं पर रहेगी, ताकि संभावित वित्तीय कमी की भरपाई की जा सके। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय सहायता कम होने पर राज्य सरकार को अतिरिक्त संसाधन जुटाने या विकास योजनाओं की प्राथमिकताओं में बदलाव करना पड़ सकता है। सड़क, पुल, पेयजल, सिंचाई और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं की गति भी प्रभावित हो सकती है। मुख्यमंत्री की विभिन्न विकास घोषणाओं और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आंकड़ों में स्थिति:
50 हजार करोड़: तक कम मिल सकती है केंद्रीय सहायता
कुल बजट 2026–27: 4.38 लाख करोड़ रुपए
अनुदान में कमी: करीब 0.5% कमी
किन विभागों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर:
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)
पंचायत एवं ग्रामीण विकास
जल संसाधन विभाग
नगरीय विकास एवं आवास
पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाएं
ग्रामीण अधोसंरचना
यदि अनुदान घटा तो
विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है
नई परियोजनाओं की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं
राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ सकते हैं
मप्र वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि करों का जिस तरह से संग्रहण होता है, उसी तरह से राज्य का हिस्सा बनता है। इसे कटोत्रा नहीं बोलते हैं, रिकमेंडेश कहते हैं। सोहलवें वित्त आयोग ने अनुदान में कटोत्रा नहीं किया है, कुछ रिकमेंडेशन्स हैं। जितना कर होता है, उसी के अनुसार से योजनाएं बनती हैं।




