छतरपुर। गुरु पूर्णिमा महापर्व के अवसर पर साउथ फ्रांस के अरियाज क्षेत्र की आध्यात्मिक नगरी लवलाने में भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मातृ शक्ति के सम्मान का संदेश दिया गया। श्री मतंगेश्वर सेवा समिति खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के संयोजन में योगिनी केथी जी के योग स्टूडियो में मातृ शक्ति पूजन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में पांच संतानों का लालन-पालन करने वाली माताओं का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन और सम्मान किया गया। भारतीय परंपरा के अनुसार पुष्प और तिलक अर्पित कर माताओं के त्याग, सेवा और परिवार निर्माण में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस दौरान भारतीय संस्कृति में परिवार व्यवस्था, मातृत्व और संस्कारों के महत्व पर भी चर्चा हुई।
पंडित सुधीर शर्मा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र और संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसका परिवार होता है। परिवार मजबूत रहेगा तो संस्कृति और मानवीय मूल्य भी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने यूरोप में बदलती जनसंख्या संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृत्व, परिवार और नई पीढ़ी के महत्व को समझना वर्तमान समय की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति परिवार, प्रेम, सेवा, करुणा और अगली पीढ़ी के निर्माण को महत्वपूर्ण दायित्व के रूप में देखती है।
उन्होंने उपस्थित लोगों को विश्व धरोहर नगरी खजुराहो आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर केवल उत्कृष्ट शिल्पकला के प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन, सृष्टि, परिवार, प्रेम, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का भी संदेश देते हैं। उन्होंने सात्विक भोजन, योग, ध्यान और भारतीय जीवन-दर्शन को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही आचार्य ओशो के विचारों का उल्लेख करते हुए प्रेम, करुणा और सृजनशीलता के महत्व पर प्रकाश डाला।
समारोह में फ्रांस सहित विभिन्न देशों के योग साधकों और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था रखने वाले लोगों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से सांद्रिन, जेनेविएव, ओदिल, क्रिश्चियन और राधा रानी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता ने किया। समापन पर उपस्थित लोगों ने विश्व शांति, प्रेम, परिवार और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।




