भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी भारी सियासी हलचल और खींचतान के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को एक और बहुत बड़ा झटका लगा है। भोपाल की हाईप्रोफाइल हुजूर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके वरिष्ठ और कद्दावर नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना लिखित इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC चीफ) जीतू पटवारी को भेज दिया है। राज्यसभा चुनाव के ठीक पहले वरिष्ठ नेता द्वारा उठाए गए इस कदम से कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया है, वहीं सत्ता पक्ष भाजपा इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 37 वर्षों की लंबी अवधि तक कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े रहे और संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके नरेश ज्ञानचंदानी का यह फैसला ऐसे नाजुक समय पर आया है, जब राज्यसभा चुनाव की सीटों को लेकर प्रदेश की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। राजनीतिक गलियारों और सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस आलाकमान द्वारा वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का आधिकारिक उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले से नरेश ज्ञानचंदानी बेहद नाराज चल रहे थे। राजनीतिक पंडितों के बीच इस बात की पुरजोर चर्चा है कि ज्ञानचंदानी लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के धड़े के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाते रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवार के चयन को लेकर उनकी असहमति और आंतरिक नाराजगी अब पूरी तरह खुलकर धरातल पर सामने आ गई है।
नरेश ज्ञानचंदानी का यह चौंकाने वाला इस्तीफा कांग्रेस के लिए उस वक्त आया है, जब पार्टी प्रदेश में तीसरी राज्यसभा सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व जहां एक तरफ अपने तमाम विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग को रोकने की कड़ी रणनीति पर दिन-रात काम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इतने पुराने और वरिष्ठ नेता के इस्तीफे ने संगठन के भीतर चल रही गहरी अंतर्कलह, नाराजगी और गुटबाजी की चर्चाओं को एक बार फिर से हवा दे दी है।
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले घटित हुआ यह अप्रत्याशित घटनाक्रम कांग्रेस के लिए बेहद असहज और कमजोर स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि, डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस बड़े इस्तीफे पर कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बहरहाल, कांग्रेस के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और राज्यसभा चुनाव की दहलीज पर नरेश ज्ञानचंदानी का इस तरह पार्टी का साथ छोड़ना आने वाले दिनों में सूबे की राजनीति में नए और दिलचस्प समीकरणों को जन्म दे सकता है।



