जबलपुर, अनुराग शुक्ला। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को व्हीकल फैक्ट्री, जबलपुर में टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना का भूमिपूजन किया। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में इस परियोजना को जबलपुर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। परियोजना के शुरू होने से व्हीकल फैक्ट्री की तकनीकी एवं परिचालन क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।


कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जबलपुर सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, विधायक डॉ. अभिलाष पांडेय और नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज सहित सेना, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड तथा व्हीकल फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


टैंकों के रखरखाव और ओवरहॉल क्षमता होगी मजबूत


व्हीकल फैक्ट्री, जबलपुर लंबे समय से भारतीय सेना के लिए सैन्य वाहनों और उपकरणों के निर्माण तथा रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना के जरिए टैंकों की मरम्मत, रखरखाव और ओवरहॉलिंग से जुड़ी क्षमताओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर रहेगा।


इस परियोजना से रक्षा उपकरणों की संचालन क्षमता बनाए रखने के साथ स्वदेशी तकनीकी दक्षता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे जबलपुर की पहचान देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्रों में और मजबूत हो सकती है।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम


रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए देश में सैन्य उपकरणों के निर्माण के साथ उनके रखरखाव और ओवरहॉल की स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


परियोजना के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल मानव संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।


रक्षा क्षेत्र में जबलपुर की भूमिका होगी और मजबूत


भूमिपूजन कार्यक्रम में सेना, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड और व्हीकल फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने परियोजना के सामरिक और तकनीकी महत्व को रेखांकित किया। परियोजना के पूरा होने के बाद व्हीकल फैक्ट्री की कार्यक्षमता और तकनीकी क्षमता में विस्तार की उम्मीद है।


टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना को जबलपुर की दशकों पुरानी रक्षा उत्पादन पहचान को नई दिशा देने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इससे शहर की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ मध्यप्रदेश की रक्षा क्षेत्र में भूमिका भी और मजबूत होने की उम्मीद है।