छतरपुर/खजुराहो। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो के शिल्पग्राम परिसर में रविवार 18 अक्टूबर 2026 की शाम सांस्कृतिक धरोहरों के नाम रही। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (SCZCC) नागपुर की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर के मार्गदर्शन में "रामायण: साहित्य से संस्कार तक की यात्रा" विषय पर केंद्रित भव्य लोकनाट्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय लोक एवं पारंपरिक रंगमंच के जरिए रामायण की सांस्कृतिक और नैतिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास किया गया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ गरिमामय शुभारंभ, अतिथियों ने किया कलाकारों का स्वागत

सायं 7:00 बजे आयोजित इस कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि खजुराहो नगर परिषद अध्यक्ष अरुण अवस्थी, राजनगर तहसीलदार धीरज गौतम, वरिष्ठ पत्रकार आनंद अग्रवाल, थाना प्रभारी एन.के. सोलंकी, SCZCC की पीआरओ स्वेता तिवारी एवं शिल्पग्राम प्रभारी भूपेन्द्र सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान अतिथियों का सम्मान संस्था द्वारा शॉल व श्रीफल से किया गया, जबकि मंच पर पधारे लोक कलाकारों का स्वागत अतिथियों द्वारा किया गया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन राजू शुक्ला द्वारा किया गया।

दो राज्यों की अनूठी शैलियों का दिखा संगम, दर्शक हुए भावविभोर

सांस्कृतिक संध्या में देश की दो अत्यंत समृद्ध लोकनाट्य परंपराओं पर आधारित रामलीला का मंचन किया गया। तेलंगाना से आए कलाकार पुलिटी कृष्णैया और उनके साथी कलाकारों ने पारम्परिक 'चिन्दू भागवतं' शैली में रामलीला के प्रसंगों को जीवंत किया। इसके पश्चात आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध 'चिंदु यक्षगान' शैली में विख्यात कलाकार विभूति श्रीनिवास राजू एवं उनके दल ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोककलाओं के संरक्षण और नैतिक मूल्यों के विस्तार के उद्देश्य से हुआ निःशुल्क आयोजन

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रामायण के साहित्यिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना था। साथ ही विलुप्त होती पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना भी इस कार्यक्रम की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा। बड़ी संख्या में आए स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने इस निःशुल्क आयोजन का भरपूर आनंद लिया।