कैनबरा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने 'फार्मास्यूटिकल बेनिफिट्स स्कीम' (पीबीएस) के तहत सिस्टिक फाइब्रोसिस, ब्लड कैंसर, थायरॉइड और आंखों की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए सब्सिडी वाली दवाओं तक पहुंच बढ़ा दी है।स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने रविवार को बताया कि एक नवंबर से लागू हुए नए बदलावों के तहत, सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित 6 से 11 साल के वे बच्चे, जिनका वजन 30 किलोग्राम से कम है, अब 'ट्रिकाफ्टा' की ग्रेन्यूल्स फॉर्म का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह दवा इस आनुवंशिक बीमारी के मूल कारण को निशाना बनाती है।
दवा का यह नया रूप खास तौर पर उन बच्चों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें गोलियां निगलने में परेशानी होती है। सरकारी बयान के अनुसार, हर साल करीब 3,300 ऑस्ट्रेलियाई इस विस्तारित सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
यदि यह दवा पीबीएस के तहत सब्सिडी पर न मिले, तो एक प्रिस्क्रिप्शन की कीमत 20,300 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 14,200 अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो सकती है।
सरकार ने 'टेपेजा' को भी पीबीएस में शामिल किया है। इसका इस्तेमाल सक्रिय और मध्यम से गंभीर स्तर की थायरॉइड आई डिजीज के इलाज में किया जाता है। अनुमान है कि इससे हर साल करीब 310 ऑस्ट्रेलियाई मरीजों को फायदा होगा।
वहीं, 'एडसेट्रिस' तक सब्सिडी वाली पहुंच का भी विस्तार किया गया है। इससे एडवांस्ड सीडी 30-पॉजिटिव क्लासिकल हॉजकिन लिम्फोमा, जो ब्लड कैंसर का एक प्रकार है, के मरीजों के लिए शुरुआती इलाज का नया विकल्प उपलब्ध होगा। इससे हर साल लगभग 370 लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा 'रेपाथा' को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। अब पात्र मरीज सरकार की 60-दिन वाली प्रिस्क्रिप्शन योजना के तहत एक बार में अधिक मात्रा में यह दवा प्राप्त कर सकेंगे।
पीबीएस के तहत पात्र मरीजों को एक प्रिस्क्रिप्शन के लिए अधिकतम 25 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर देने होंगे। वहीं, रियायती कार्डधारकों के लिए यह राशि 7.70 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तय की गई है। सरकार ने कहा कि जुलाई 2022 से अब तक पीबीएस के तहत 511 नई और संशोधित दवाओं की सूची के लिए अतिरिक्त फंडिंग को मंजूरी दी गई है।
इस बीच, अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया के थेरेप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन (टीजीए) ने कहा था कि वह सनस्क्रीन से जुड़े नियमों को मजबूत बनाने तथा उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए सुधारों पर काम कर रहा है।
प्रस्तावित सुधारों में सनस्क्रीन की जांच के नियमों को सख्त करना, कुछ विशेष सामग्रियों के लिए गुणवत्ता मानक तय करना और कॉस्मेटिक सनस्क्रीन द्वारा किए जा सकने वाले एसपीएफ दावों की सीमा निर्धारित करना शामिल है।
एजेंसी ने बताया कि वह उत्पादन से जुड़े दिशा-निर्देशों की भी समीक्षा करेगी, ताकि कंपनियों की जिम्मेदारियां और गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाएं साफ हो सकें तथा ऑस्ट्रेलिया में बिकने वाले सनस्क्रीन उत्पादों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर लोगों का भरोसा बना रहे।
ये सुधार मार्च से मई के बीच हुई सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के बाद प्रस्तावित किए गए हैं। इस प्रक्रिया में उद्योग जगत, परीक्षण प्रयोगशालाओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, उपभोक्ता समूहों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों से लगभग 120 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं।
टीजीए के अनुसार, दुनिया में त्वचा कैंसर के सबसे ज्यादा मामलों वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया शामिल है। एजेंसी ने कहा कि सनस्क्रीन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्पाद सुरक्षित, प्रभावी और अच्छी गुणवत्ता वाले हों, ताकि लोगों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाया जा सके और त्वचा कैंसर के मामलों तथा उसके प्रभाव को कम किया जा सके।
















