जबलपुर, अनुराग शुक्ला। केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) जबलपुर मुख्यालय में अपर निदेशक डॉ. पंकज पाटिल की अध्यक्षता में जोनल बैठक आयोजित की गई। बैठक में पेंशनर एसोसिएशन के विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ सलाहकार प्रतिनिधियों ने लाभार्थियों से जुड़ी समस्याओं और पिछली बैठक में उठाए गए मुद्दों की समीक्षा की।


बैठक में जबलपुर की छह सीजीएचएस डिस्पेंसरियों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी का मुद्दा भी उठा। इस पर बताया गया कि रिक्तियों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर प्रतिनिधियों ने गंभीर चिंता जताई। वरिष्ठ सलाहकार प्रतिनिधि सुभाष चंद्रा, राजेन्द्र सिंह, कुँवर सिंह और अशोक नामदेव ने कहा कि जनऔषधि की दवाओं के असरहीन होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उन्होंने संबंधित दवाओं की लैब जांच कराने की मांग की, ताकि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।


प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकृत अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जरूरत के अनुसार लिखी गई दवाओं के स्थान पर अधिकृत सप्लायर द्वारा दूसरी दवा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा में अनधिकृत बदलाव गंभीर मामला है। इस पर अपर निदेशक डॉ. पंकज पाटिल ने बताया कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले सप्लायरों पर अर्थदंड का प्रावधान है।


बैठक में प्रतिनिधियों ने मांग की कि लाभार्थियों को चिकित्सक द्वारा निर्धारित गुणवत्तापूर्ण और ब्रांडेड दवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा दवाओं की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित हो। इसके अलावा आयुर्वेदिक अस्पतालों को सीजीएचएस के पैनल में शामिल करने, आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियों में फार्मासिस्ट की पोस्टिंग और लाभार्थियों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। अपर निदेशक ने बताया कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई जारी है।


डिस्पेंसरी नंबर-2 की प्रभारी डॉक्टर के व्यवहार का मुद्दा भी उठा। प्रतिनिधियों ने प्रभारी डॉक्टर पर दुर्व्यवहार, तानाशाही और धमकी के आरोप लगाते हुए लाभार्थियों की शिकायतों से अपर निदेशक को अवगत कराया। डॉ. पाटिल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने की बात कही।


अधिकृत अस्पतालों में लाभार्थियों की पात्रता के अनुसार उपलब्ध कमरों की संख्या प्रमुखता से प्रदर्शित करने और इसकी नियमित पुष्टि की व्यवस्था करने की मांग भी बैठक में रखी गई। विंध्य प्रांत के सलाहकार प्रतिनिधि रमा शंकर शुक्ला ने रीवा और आसपास के लाभार्थियों की समस्याएं उठाते हुए रीवा शहर के सर्वसुविधायुक्त अस्पतालों को भी सीजीएचएस के तहत मान्यता देने की मांग की। इस पर बताया गया कि रीवा जिला भोपाल संभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए इस संबंध में सीजीएचएस भोपाल के अपर निदेशक स्तर से समाधान किया जा सकता है।


बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि सीजीएचएस का उद्देश्य लाभार्थियों को बेहतर, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए दवाओं की गुणवत्ता, डॉक्टरों और स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता तथा अस्पतालों में उपचार सुविधाओं के विस्तार की नियमित निगरानी जरूरी है।


बैठक में उपस्थित सलाहकार प्रतिनिधियों ने अपर निदेशक डॉ. पंकज पाटिल की लाभार्थियों के प्रति सम्मानजनक और सहयोगात्मक पहल की सराहना की। इस अवसर पर सुभाष चंद्रा, कुँवर सिंह, अजय शुक्ला, राजेन्द्र सिंह, एस.के. बनर्जी, अनिल शुक्ला, गुरमुख दास तलरेजा, रमा शंकर शुक्ला, डी.के. सिंह, जी.पी. विश्वकर्मा, अशोक नामदेव, के.एन.एस. यादव और अजय सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। अपर निदेशक के निजी सचिव राकेश रोशन, वीरेंद्र सिंह तथा सेल्वी हॉस्पिटल, आशीष हॉस्पिटल और अपोलो हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। अंत में राकेश रोशन ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।