जबलपुर, अनुराग शुक्ला। संस्कारधानी जबलपुर के पावन तिलवारा घाट स्थित मां नर्मदा तट पर शनिवार को श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही मां नर्मदा की भव्य एवं दिव्य आरती ने एक बार फिर हजारों श्रद्धालुओं के हृदय को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। संध्या बेला में जब मां नर्मदा के तट पर दीपों की पंक्तियां सजीं, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार गूंजे, तब पूरा वातावरण भक्तिमय और अलौकिक हो उठा।


मां नर्मदा की आरती के साथ-साथ नर्मदा तट की स्वच्छता को लेकर भी विशेष संदेश दिया गया। इस अभियान के प्रेरणास्रोत प्रधानाचार्य पूज्य श्री अखिलेश दास जी महाराज ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “मां नर्मदा केवल जलधारा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की चेतना हैं। जिस प्रकार हम अपनी मां के आंचल को स्वच्छ रखते हैं, उसी प्रकार मां नर्मदा के तटों को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखना प्रत्येक सनातनी का प्रथम कर्तव्य है।”


उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना और आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति संरक्षण का महाअभियान है। महाराज श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आवाहन किया कि वे प्लास्टिक मुक्त नर्मदा तट, स्वच्छ घाट और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने में अपना सक्रिय योगदान दें।


इसी कड़ी में श्री बागेश्वर धाम शिष्य मंडल द्वारा लिए गए संकल्प — “हर मंदिर, हर नर्मदा तट, हर हिंदू और हर सनातनी तक हनुमान चालीसा पाठ पहुंचाना” — को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मंडल के सदस्यों ने बताया कि समाज में धर्म, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत करने के उद्देश्य से यह अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।


महाराज श्री के आदेशानुसार गंगा दशहरा के पावन अवसर पर तिलवारा घाट मां नर्मदा तट से सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ अभियान का भव्य शुभारंभ किया जाएगा। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं, मातृशक्ति एवं सनातन प्रेमियों के शामिल होने की संभावना है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां नर्मदा की पावन साक्षी में होने वाला यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना और सनातन एकता का नया संदेश देगा।


वहीं शनिवार को तिलवारा घाट मंदिर परिसर में शनि देव महाराज का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में उमड़ने लगी थी। भक्तों ने शनि देव महाराज का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर तेलाभिषेक किया तथा काले तिल, सरसों का तेल एवं पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि और कष्ट निवारण की कामना की।


मंदिर परिसर में “जय शनिदेव महाराज” के जयघोष गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन एवं शनि स्तोत्र पाठ के माध्यम से भक्तिमय वातावरण निर्मित किया। संध्या के समय दीपों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित मंदिर परिसर अत्यंत मनोहारी दिखाई दे रहा था। श्रद्धालुओं का कहना था कि शनि देव महाराज न्याय और कर्मफल के देवता हैं तथा उनकी कृपा से जीवन के कष्ट दूर होकर सुख और शांति प्राप्त होती है।


शनि जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। बच्चों, युवाओं और मातृशक्ति की सक्रिय उपस्थिति ने पूरे आयोजन को और अधिक भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।


पूरे आयोजन के दौरान मां नर्मदा की सेवा, सनातन संस्कृति के संरक्षण, स्वच्छता जागरण और सामूहिक भक्ति का जो अद्भुत दृश्य देखने को मिला, उसने सभी श्रद्धालुओं के मन को गहराई से भावविभोर कर दिया। उपस्थित भक्तों ने संकल्प लिया कि वे धर्म, संस्कृति और संस्कारों की इस पावन परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।