मुरैना, देवेन्द्र सिंह राजपूत। पगारा डैम के सभी छह गेट खुलने के बाद आसन नदी उफान पर आ गई थी। नदी का पानी आसपास के तटीय इलाकों में पहुंचने से प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया था। बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम लगातार रेस्क्यू कर रही है। इसी बीच सिविल लाइन थाना क्षेत्र के डोमपुरा पंचायत के डाबरीपुरा स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में तीन दिन से फंसे साधु को निकालने पहुंची रेस्क्यू टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।
मंदिर के चारों तरफ बाढ़ का पानी भर जाने के कारण वहां रहने वाले साधु नरसिंह दास मंदिर में ही फंस गए थे। साधु के मंदिर में फंसे होने की जानकारी पटवारी ने तहसीलदार मुरैना को दी। सोमवार को तहसीलदार के निर्देश पर एसडीईआरएफ की टीम नाव लेकर साधु को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मंदिर पहुंची।
रेस्क्यू टीम ने साधु नरसिंह दास से बातचीत कर उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन साधु ने मंदिर छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। साधु का कहना था कि मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है और उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं है। उनके लिए खाने-पीने की भी पर्याप्त व्यवस्था है। इसलिए वह मंदिर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। इसके बाद रेस्क्यू टीम को बिना साधु को निकाले ही वापस लौटना पड़ा।
‘हमें कुछ भी हो जाए, हम यहां से नहीं निकलेंगे’
साधु नरसिंह दास ने कहा कि मंदिर के चारों तरफ पानी भरा हुआ है और वे यहां से निकलकर नहीं जा सकते। मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, खाने-पीने का सामान भी उपलब्ध है और वे मंदिर में ही रहेंगे। “हमें कुछ भी हो जाए, हम यहां से नहीं निकलेंगे।”
ग्रामीणों ने भी साधु तक खाने-पीने की सामग्री पहुंचाई है, जिससे उनके लिए फिलहाल भोजन-पानी की व्यवस्था बनी हुई है।
तीन दिन में 70 लोगों का रेस्क्यू
एसडीईआरएफ प्रभारी प्रमोद डंडौतिया ने बताया कि पिछले तीन दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जौरा क्षेत्र के चिलर से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि देवगढ़ से 41 लोगों का रेस्क्यू किया गया। अब तक टीम करीब 70 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल चुकी है।
उन्होंने बताया कि तहसीलदार मुरैना से सूचना मिलने के बाद डोमपुरा के सिद्ध बाबा मंदिर में फंसे पुजारी को निकालने के लिए टीम भेजी गई थी। टीम ने पुजारी से बाहर आने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। उनके लिए खाद्य सामग्री भेजी गई है। राहत की बात यह है कि अब नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।














