नई दिल्ली। भारत में माइकल फरेरा का नाम बिलियर्ड्स के एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में लिया जाता है। 'बॉम्बे टाइगर' के उपनाम से मशहूर फरेरा तीन बार के एमेच्योर विश्व चैंपियन रहे हैं। उनकी तकनीक, धैर्य और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें भारत में बिलियर्ड्स का प्रमुख चेहरा बनाया। फरेरा ने भारत में बिलियर्ड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

माइकल फरेरा का जन्म 1 अक्टूबर 1938 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। फरेरा को सेंट जोसेफ स्कूल, दार्जिलिंग में पढ़ाई के दौरान बिलियर्ड्स में रुचि हुई। इसके बाद सेंट जेवियर्स कॉलेज और मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने इस खेल में खुद को निखारा।

उन्होंने पहली बार 1960 में भारतीय राष्ट्रीय बिलियर्ड्स चैंपियनशिप में भाग लिया और 1964 में न्यूजीलैंड में आयोजित विश्व एमेच्योर बिलियर्ड्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस टूर्नामेंट में वह सेमीफाइनल तक पहुंचे थे।

फरेरा ने 1977 में अपना पहला विश्व एमेच्योर बिलियर्ड्स चैंपियनशिप का खिताब जीता। उसी वर्ष उन्होंने विश्व ओपन बिलियर्ड्स चैंपियनशिप का खिताब भी जीता था। 1978 में, वे बिलियर्ड्स नेशनल चैंपियनशिप में 1,000 पॉइंट्स का बैरियर तोड़ने वाले पहले एमेच्योर खिलाड़ी बने और 1,149 पॉइंट्स बनाकर एक नया एमेच्योर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

फरेरा को 1981 में दूसरा वर्ल्ड एमेच्योर टाइटल जीतने के बाद पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। फरेरा ने पद्मश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था। वह अपनी तुलना सुनील गावस्कर से कर रहे थे और उनकी तरह पद्मभूषण पुरस्कार चाहते थे। फरेरा ने 1983 में अपना तीसरा वर्ल्ड एमेच्योर बिलियर्ड्स खिताब जीता था और इसके बाद उसी वर्ष उन्हें पद्मभूषण सम्मान दिया गया। वह यह सम्मान हासिल करने वाले देश के पहले बिलियर्ड्स खिलाड़ी हैं।

पद्मभूषण सम्मान के अलावा, माइकल फरेरा को महाराष्ट्र राज्य सरकार के शिव छत्रपति पुरस्कार (1971), अर्जुन पुरस्कार (1973) से सम्मानित किया जा चुका है।

फरेरा को बिलियर्ड्स और स्नूकर में बतौर कोच उनकी उपलब्धियों के लिए 2001 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।