मुंबई। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने दिल्ली में सीजेपी से जुड़े आंदोलन में लाठीचार्ज, प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन, नीट और टीईटी पेपर लीक विवाद समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सरकार को आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए।सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर वारिस पठान ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज करना और आंसू गैस के गोले छोड़ना पूरी तरह अनुचित है। छात्र अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर संविधान के दायरे में रहकर अहिंसक तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, ऐसे में उनके खिलाफ बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस पूरे घटनाक्रम की आलोचना करते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। सरकार आंदोलनकारियों से संवाद करने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई कर रही है।
वारिस पठान ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग हुआ हो। इससे पहले वकीलों के आंदोलन, किसान आंदोलन और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई आज भी लोगों को याद है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार संविधान ने दिया है और सरकार को असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उससे संवाद करना चाहिए। संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। छात्र तिरंगा और संविधान हाथ में लेकर अहिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
नीट और टीईटी पेपर लीक का उल्लेख करते हुए पठान ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नीट परीक्षा में लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और युवाओं में गहरा आक्रोश है। छात्र केवल यह मांग कर रहे हैं कि जिनकी वजह से उनका भविष्य प्रभावित हुआ है, उनकी जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। सरकार इस मुद्दे पर छात्रों से बातचीत करने के बजाय उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
एआईएमआईएम नेता ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। महिलाओं और छात्राओं के साथ कथित रूप से हुई पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो बेहद चिंताजनक हैं। उनकी पार्टी छात्रों के अधिकारों के समर्थन में पहले भी खड़ी रही है और आगे भी रहेगी। पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आंदोलनकारी सांसद चंद्रशेखर आजाद से भी मुलाकात कर समर्थन व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन पर पूछे गए सवाल के जवाब में वारिस पठान ने कहा कि हर राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से अपनी बात रख रहा है। यह कांग्रेस पार्टी का कार्यक्रम है और वह इस पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते।
उत्तर प्रदेश की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद पर वारिस पठान ने कहा कि यदि किसी निर्माण को लेकर कानूनी विवाद है तो कानून में उसके समाधान के कई प्रावधान मौजूद हैं। किसी विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त करने से वहां पढ़ने वाले हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा। यदि कहीं अतिक्रमण या अन्य कानूनी समस्या है तो सरकार रेगुलराइजेशन या कंपाउंडिंग जैसे कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है। किसी शैक्षणिक संस्थान को नुकसान पहुंचाने के बजाय छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और दावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सरकार को बल प्रयोग के बजाय छात्रों के साथ संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में बातचीत ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान है।














