टीकमगढ़, मोहसिन अहमद। शहर के मामौन दरवाजा निवासी पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार ने मारपीट की घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि हमले में घायल होने के बावजूद पुलिस ने न तो उनकी शिकायत दर्ज की और न ही लिखित आवेदन लेकर उसकी पावती दी। आखिरकार उन्हें स्वयं जिला अस्पताल पहुंचकर मेडिकल लीगल केस (MLC) करानी पड़ी।
लोकेन्द्र सिंह परमार के मुताबिक, 2 अगस्त की रात उनके भाई अभिनेन्द्र सिंह परमार का पीजी कॉलेज, कुण्डेश्वर रोड स्थित एक भोजनालय पर विवाद हुआ था। सूचना मिलने पर जब वे मौके पर पहुंचे तो शिवम जड़िया, ऋषि जड़िया और साहिल हरदशानी ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऋषि जड़िया ने नुकीले/धारदार हथियार से उनके माथे पर हमला किया और कान से सोने की बाली खींच ली। घटना में उनके सिर, आंख के पास और हाथ में चोटें आईं।
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि घटना के बाद वे रात करीब 12 बजे से सुबह 4 बजे तक पुलिस कार्रवाई का इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को सामान्य मारपीट का बताते हुए सोने की बाली छीने जाने की बात शिकायत में शामिल करने को तैयार नहीं हुई। जब उन्होंने लिखित आवेदन देने की कोशिश की तो कथित रूप से आवेदन लेने और उसकी पावती देने से भी इनकार कर दिया गया।
लोकेन्द्र सिंह का कहना है कि पुलिस से कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्हें स्वयं जिला अस्पताल जाकर एमएलसी करानी पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही हमले के आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और शिकायत लेने से कथित तौर पर इनकार करने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
मामले में लगाए गए आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।




