भोपाल | राजधानी भोपाल में आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और अवैध निर्माताओं के खिलाफ नगर निगम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। नगर निगम के उड़नदस्ते ने भदभदा चौराहे के समीप लंबे समय से संचालित एक अवैध कुल्फी और आइसक्रीम निर्माण इकाई पर औचक छापा मारकर उसे पूरी तरह सील कर दिया। निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री के भीतर बेहद गंदगी और अस्वास्थ्यकर माहौल में उत्पादन होता पाया गया, जिससे खाद्य सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ रही थीं।


मस्जिद और मदरसे के बीच शेड में चल रहा था अवैध कारोबार

यह पूरी कार्रवाई स्थानीय नागरिकों की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर की गई। बताया गया कि भदभदा चौराहे के पास मस्जिद और मदरसे के बीच बने एक शेडनुमा अस्थाई भवन में बिना किसी वैध लाइसेंस और आवश्यक अनुमतियों के बड़े पैमाने पर कुल्फी और आइसक्रीम तैयार की जा रही थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उत्पादन में इस्तेमाल की जा रही बर्फ और अन्य कच्चे माल की गुणवत्ता बेहद संदिग्ध है, जिसके बाद निगम का अमला हरकत में आया।


स्वच्छता के बुनियादी नियम गायब, बर्तनों में जमी थी गंदगी

अधिकारियों ने जब निर्माण इकाई के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा बेहद चौंकाने वाला था।

"उत्पादन क्षेत्र में साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं था। कुल्फी जमाने वाले सांचे और बर्तन बेहद गंदे थे। स्वच्छता के बुनियादी नियमों की सरेआम अनदेखी की जा रही थी। खासकर भीषण गर्मी के इस मौसम में जब ठंडे खाद्य पदार्थों की मांग चरम पर है, ऐसे दूषित माहौल में बनी आइसक्रीम से फूड पॉइजनिंग और पेट जनित गंभीर संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा था।"

- निरीक्षण दल, नगर निगम भोपाल


सामान जब्त, लैब भेजे गए कुल्फी और बर्फ के नमूने

कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए नगर निगम की टीम ने फैक्ट्री के संचालक शकील खान पर मौके पर ही 10,000 रुपये का नगद जुर्माना ठोंका। इसके साथ ही फैक्ट्री में लगीं मिक्सर मशीनें, रेफ्रिजरेटर, कच्चा माल और अन्य सहायक सामग्रियां जब्त कर ली गईं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मौके से आइसक्रीम, कुल्फी और निर्माण में प्रयुक्त होने वाली बर्फ के कई नमूने (सैंपल्स) कलेक्ट किए हैं, जिन्हें तत्काल जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेज दिया गया है।


रिपोर्ट आने पर दर्ज हो सकती है FIR; निगम की जनता से अपील

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। यदि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल, मिलावट या मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तत्व पाए जाते हैं, तो संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। नगर निगम प्रशासन ने साफ किया है कि शहर में खाद्य सामग्री बनाने वाले किसी भी छोटे-बड़े संस्थान को नियमों के उल्लंघन की छूट नहीं दी जाएगी। निगम ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कहीं भी गंदगी के बीच या अवैध रूप से खाद्य पदार्थों का निर्माण हो रहा हो, तो तुरंत इसकी सूचना निगम प्रशासन को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।