भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा में बुधवार को विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य भर में धान की खरीद में कथित कुप्रबंधन को लेकर भारी हंगामा किया।
कार्यवाही शुरू होते ही, बैनर लिए बीजेडी सदस्य स्पीकर सुरमा पाधी के पोडियम के पास पहुंच गए और राज्य की मंडियों में फैली 'अव्यवस्था' को लेकर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे।
विरोध प्रदर्शन के एक अनूठे तरीके के रूप में, कुछ बीजेडी विधायकों ने सदन के अंदर पत्रकारों की मेज पर धान और धान की बोरियां रख दीं। कांग्रेस सदस्यों ने भी किसानों से संबंधित मुद्दों पर सदन के अंदर सरकार विरोधी नारे लगाए।
विपक्षी सदस्यों द्वारा मचाए गए भारी हंगामे के कारण ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी को सदन को सुबह 11:30 बजे तक और फिर शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
बीजेडी की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि पार्टी ने राज्य सरकार से कई बार अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और कृषि मंत्री से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी की थी ताकि धान की कटाई न होना और खरीद के दौरान अलग-अलग बहाने बनाकर 'कटनी-छटनी' की प्रथा जारी रहने सहित किसानों की समस्याओं की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की 800 रुपए की इनपुट सब्सिडी सहित 3,100 रुपए प्रति क्विंटल के वादे से उत्साहित होकर किसानों ने इस वर्ष अधिक धान की खेती की है।
मल्लिक ने कहा कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,300 रुपए प्रति क्विंटल के अतिरिक्त 800 रुपए प्रति क्विंटल की इनपुट सब्सिडी के वितरण के लिए प्रति किसान धान की 150 क्विंटल की सीमा तय करने के फैसले के बाद किसान अब संकट में हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार के वादे के विपरीत, राज्य भर की मंडियों में खरीद के दौरान मिल मालिकों द्वारा धान की अवैध कटौती (कटनी-छटनी) 10 किलो प्रति क्विंटल तक बेरोकटोक जारी है। किसानों को बिचौलियों के माध्यम से बाजार में धान बहुत कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बीजेडी नेता ने मुख्यमंत्री और कृषि एवं खाद्य आपूर्ति मंत्रियों द्वारा इस मुद्दे पर जारी बयानों में असंगति का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार किसानों की धान की पूरी फसल उठाने के लिए कोई निश्चित समय सीमा घोषित नहीं करती, तब तक बीजेडी अपना विरोध जारी रखेगी।
कांग्रेस नेताओं ने भी इन्हीं मुद्दों को उठाया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार, चावल मिल मालिकों के साथ मिलीभगत करके, किसानों को धान की मजबूरी में मजबूर कर रही है।
इस बीच, सत्ताधारी दल के नेताओं ने बीजद और कांग्रेस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्य ओडिशा के विकास पर किसी भी चर्चा को रोकने के लिए जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं।
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