छतरपुर/नौगांव/महोबा, कमल यादव। उत्तर भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक 845वें कजली मेले का शनिवार शाम महोबा के हवेली दरवाजा स्थित शहीद स्थल पर भव्य शुभारंभ हुआ। जिले के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर और सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने जिलाधिकारी गजल भारद्वाज एवं पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह की मौजूदगी में फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया।


मेले के शुभारंभ के दौरान हाथी-घोड़ों पर सवार वीर आल्हा-ऊदल, राजा परमार और राजकुमारी चंद्रावल की प्रतीकात्मक भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक झांकियों को देखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिससे मेला परिसर में हजारों दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी।


राष्ट्रीय मेला घोषित कराने की होगी सिफारिश


प्रभारी मंत्री मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी ने कहा कि कजली मेला चंदेलकालीन ऐतिहासिक और प्राचीन मेला है, जिसकी ख्याति देश-विदेश तक है। उन्होंने कहा कि मेले को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इसे राष्ट्रीय मेला घोषित करने की सिफारिश की जाएगी।


सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने कहा कि कजली मेला महोबा की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मेले को राजकीय मेला घोषित कराने की मांग विधानसभा में भी उठाई जा चुकी है और उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जल्द इस मांग को पूरा करेंगे।


आल्हा-ऊदल की वीरगाथा से जुड़ा है मेला


कजली मेले के इतिहास को लेकर बताया जाता है कि महोबा के राजा परमार की पुत्री राजकुमारी चंद्रावल अपनी सखियों के साथ ऐतिहासिक कीरत सागर सरोवर में कजलियां विसर्जित करने जा रही थीं। इसी दौरान दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान की सेना ने महोबा पर हमला कर राजकुमारी चंद्रावल का अपहरण कर लिया था।


उस समय राजा परमार के सेनापति वीर आल्हा और ऊदल महोबा में मौजूद नहीं थे। सूचना मिलने के बाद दोनों वीर महोबा पहुंचे और पृथ्वीराज चौहान की सेना से युद्ध कर राजकुमारी चंद्रावल को मुक्त कराया। इस युद्ध में पृथ्वीराज की सेना को हार का सामना करना पड़ा। इसी ऐतिहासिक विजय की स्मृति में महोबा में रक्षाबंधन के अगले दिन कजली पर्व और मेले के आयोजन की परंपरा चली आ रही है।


सुरक्षा के कड़े इंतजाम


मेले को लेकर पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मेला परिसर और आसपास के क्षेत्र में 7 सीओ, करीब 100 सब इंस्पेक्टर और 300 पुलिस कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा एक कंपनी पीएसी की भी तैनाती की गई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।


जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने जनपदवासियों को कजली मेले की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ग्रामीण अंचलों से कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट भी तैनात किए गए हैं।


उन्होंने बताया कि मेला ऐतिहासिक कीरत सागर के तटबंध पर आयोजित हो रहा है और सरोवर के पूरी तरह भर जाने के कारण सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।