छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना न केवल बुंदेलखंड में जल संकट दूर करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि विस्थापित हो रहे निर्धन आदिवासी परिवारों के जीवन में समृद्धि और विकास का नया सवेरा भी ला रही है। परियोजना के तहत बनने वाले ढोढ़न बांध से जहां लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और पेयजल की समस्या हल होगी, वहीं प्रभावित ग्राम पलकौंहा के निवासी गब्बर आदिवासी जैसे भूमिहीन परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल गया है। कई पीढ़ियों से मिट्टी के कच्चे घरों में अभावों के बीच गुजर-बसर कर रहे इस परिवार को मिले पुनर्वास पैकेज ने पक्की छत और आर्थिक सुरक्षा का सपना साकार कर दिया है।
पीढ़ियों का संघर्ष हुआ खत्म, ग्राम पीरा में बन रहा पक्का आशियाना
ग्राम पलकौंहा निवासी गब्बर आदिवासी ने बताया कि उनके पूर्वजों की कई पीढ़ियां मिट्टी के कच्चे झोपड़ों में अभावों के बीच गुजर गईं। न तो उनके पास अपनी खेती की जमीन थी और न ही पक्का मकान बनाने के साधन। मजदूरी और तंगहाली के बीच जीवन कट रहा था। लेकिन केन-बेतवा लिंक परियोजना के पुनर्वास एवं विस्थापन पैकेज ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। मुआवजे की राशि प्राप्त होने के बाद गब्बर ने ग्राम पीरा में नया आवासीय प्लॉट खरीदा है, जहां उनका पक्का मकान आकार ले रहा है। इसके साथ ही वे परिवार के भरण-पोषण के लिए खेती की जमीन खरीदने की योजना भी बना रहे हैं।
परिवार के 5 सदस्यों को मिले कुल ₹67.76 लाख से अधिक
शासन के पुनर्वास पैकेज के तहत गब्बर आदिवासी के परिवार के सभी वयस्क सदस्यों को पात्रतानुसार मुआवजा प्रदान किया गया है:
- पुनर्वास पैकेज (62.50 लाख): परिवार के 5 सदस्यों—माता फुलिया आदिवासी (पत्नी स्व. मलखान आदिवासी), गब्बर आदिवासी तथा उनके तीन भाइयों राजू आदिवासी, पप्पू आदिवासी और राजकुमार आदिवासी को प्रति व्यक्ति 12.50 लाख की दर से कुल 62 लाख 50 हजार प्राप्त हुए।
- मकान का मुआवजा: पुराने आवास के मूल्यांकन के आधार पर 5 लाख 26 हजार 608 की राशि स्वीकृत की गई।
- कुल प्राप्त राशि: परिवार को कुल मिलाकर 67 लाख 76 हजार 608 की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में प्रदान की गई है।
विकास और सुविधाओं की मुख्यधारा से जुड़े विस्थापित परिवार
गब्बर आदिवासी का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके पास अपना पक्का मकान होगा और वे खुद की कृषि भूमि के मालिक बन सकेंगे। सरकार द्वारा दी गई पारदर्शी और समयबद्ध मुआवजा राशि ने उनके परिवार को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बना दिया है। परियोजना से विस्थापित हो रहे अन्य परिवार भी अब बुनियादी सुविधाओं, सड़क, बिजली, पानी और आधुनिक जीवनशैली से युक्त नई बसाहटों में बसकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।




