देवास, हेमंत गुर्जर। जिले में इस वर्ष ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ते के संग्रहण पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जंगलों में पर्याप्त मात्रा में तेंदूपत्ता नहीं मिल पा रहा है, वहीं पत्तों की गुणवत्ता भी कमजोर बताई जा रही है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा संग्रहण लक्ष्य में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने से समितियों और श्रमिकों की चिंता बढ़ गई है।
तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल पहुंचे श्रमिकों का कहना है कि घंटों मेहनत के बाद भी पर्याप्त पत्ते नहीं मिल रहे हैं। हालत यह है कि 50 पत्तों की एक गड्डी में मुश्किल से 10 पत्ते ही अच्छे निकल पा रहे हैं, जबकि बाकी पत्ते छोटे, कटे-फटे या खराब गुणवत्ता के हैं। इससे श्रमिकों की मजदूरी और आय पर भी असर पड़ रहा है।
इधर वन मुख्यालय द्वारा इस साल संग्रहण लक्ष्य बढ़ाए जाने से समितियों पर दबाव बढ़ गया है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बढ़े हुए टारगेट को पूरा करने की जल्दबाजी में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। खराब और छोटे पत्तों को भी गड्डियों में शामिल किया जा रहा है, जिससे आगे चलकर व्यापार और संग्रहण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीणों और श्रमिकों ने मांग की है कि वन विभाग जमीनी स्थिति को देखते हुए लक्ष्य में राहत दे और गुणवत्ता के अनुसार ही संग्रहण कराया जाए, ताकि श्रमिकों पर अनावश्यक दबाव न बने।




