Sunday, February 22, 2026

LOGO

BREAKING NEWS
मध्य प्रदेशइंदौरभागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर जारी: 33वीं मौत

भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर जारी: 33वीं मौत

Post Media
News Logo
PeptechTime
6 फ़रवरी 2026, 06:11 am IST
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter/XOpen Instagram
Copy Link

Advertisement

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार देर रात एक और बुजुर्ग की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। मृतक का नाम अलगूराम यादव (70) है। उन्हें 9 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्हें उल्टी-दस्त के साथ सांस संबंधी गंभीर तकलीफ थी।


परिजनों के अनुसार, अलगूराम यादव को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। दूषित पानी पीने के बाद हुई उल्टी-दस्त की शिकायत पर उन्हें अस्पताल में एडमिट किया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दुखद बात यह है कि उनकी पत्नी उर्मिला यादव की भी इसी दूषित पानी से एक महीने पहले मौत हो चुकी है। उर्मिला को भी उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन वे नहीं बच पाईं।


बेटे संजय यादव ने बताया, "पिता स्वस्थ थे, लेकिन दूषित पानी ने सब कुछ छीन लिया। परिवार अब दो सदस्यों को खो चुका है।"


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्तमान में अस्पताल में मात्र तीन मरीज भर्ती हैं, जबकि अब तक 450 से अधिक मरीज इलाज करा चुके हैं और डिस्चार्ज हो गए हैं। इससे पहले 1 फरवरी को 32वीं मौत हुई थी, जब अनीता कुशवाह (65) ने बॉम्बे हॉस्पिटल में लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद दम तोड़ा। उनके बेटे नीलेश ने भी बताया था कि मां को पहले कोई बीमारी नहीं थी।


मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। 27 जनवरी को कोर्ट ने शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को 'आई-वॉश' करार देते हुए कहा था कि यह गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति है। कोर्ट ने स्वच्छ पेयजल को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा बताते हुए स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने का आदेश दिया था।


सुनवाई के दौरान सरकार ने 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की, जिसमें 16 मौतें दूषित पानी से जुड़ी बताई गईं, जबकि 4 पर असमंजस और 3 को असंबंधित माना गया। याचिकाकर्ताओं ने करीब 30 मौतों का दावा किया। कोर्ट ने मौतों के आंकड़ों पर गंभीर असहमति जताई और रिपोर्ट में स्पष्ट कारणों व वैज्ञानिक आधार की कमी बताई।


यह घटना दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुई थी, जब भागीरथपुरा में पाइपलाइन में सीवेज मिलने से पानी दूषित हो गया, जिससे उल्टी-दस्त जैसी जलजनित बीमारियां फैलीं। नगर निगम की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल भी सरकार पर हमलावर हैं।


Today In JP Cinema, Chhatarpur (M.P.)