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बागेश्वर महाराज का नया मिशन: 'विद्या दान' से गढ़े जाएंगे राम-कृष्ण की परंपरा वाले युवा

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23 फ़रवरी 2026, 08:02 am IST
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खजुराहो। बुंदेलखंड की धरती पर स्थित बागेश्वर धाम अब केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कारों की पाठशाला बनने जा रहा है। हिंदू गांव और कैंसर अस्पताल के संकल्प के बाद, पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 'वैदिक गुरुकुलम' के जरिए भावी पीढ़ी को गढ़ने की शुरुआत कर दी है। 13 फरवरी 2026 को देश के विख्यात संतों—रमेश भाई ओझा और पंडित प्रदीप मिश्रा की उपस्थिति में इस प्रकल्प का शुभारंभ हुआ।


तीन मंजिला इमारत में गूंज रहे मंत्र धाम से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक शांत इलाके में निर्मित तीन मंजिला भव्य इमारत अब 50 बटुकों का घर है। सुबह 4 बजे शंख की गूँज और ‘कराग्रे वसते लक्ष्मीः’ के मंत्रोच्चार के साथ यहाँ दिनचर्या शुरू होती है। वर्तमान में यहाँ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल तक के छात्र प्रवेश ले चुके हैं।


शस्त्र और शास्त्र की दोहरी शिक्षा गुरुकुल के प्रधानाचार्य आचार्य गोपाल चरण पांडे 'राजा शास्त्री' के अनुसार, यहाँ केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि मर्यादित जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है।


पाठ्यक्रम: वेद, पुराण, ज्योतिष और व्याकरण के साथ-साथ अप्रैल से धनुर्विद्या (तीरंदाजी), तलवारबाजी, भाला चलाना और प्राचीन मल्लविद्या (कुश्ती) का प्रशिक्षण शुरू होगा।


डिग्री की मान्यता: यह संस्थान केवल एक कोचिंग नहीं बल्कि एक पूर्ण शिक्षा बोर्ड होगा। यहाँ 6वीं से ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई को 'प्रथमा', 'मध्यमा' और 'शास्त्री' जैसी उपाधियाँ दी जाएंगी, जो वैदिक सनातन बोर्ड से मान्यता प्राप्त होंगी।


बनारस के विद्वान संभाल रहे कमान बटुकों को शिक्षित करने के लिए काशी (वाराणसी) से विशेष शिक्षकों की टीम बुलाई गई है। आचार्य कृष्ण कुमार दीक्षित (वेद) और शिवम कुमार पांडे (ज्योतिष) जैसे विद्वान छात्रों को प्राचीन विद्याओं में पारंगत करेंगे। सेवादार ऋषि शुक्ला ने बताया कि इस गुरुकुल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशा और अपराध जैसी बुराइयों से दूर रखकर उन्हें राम-कृष्ण की परंपरा से जोड़ना है।


भविष्य की योजना फिलहाल 50 छात्रों से शुरू हुए इस गुरुकुल में सीटों की संख्या बढ़ाकर 250 की जाएगी। पंडित धीरेंद्र शास्त्री का संकल्प है कि भोजन और धन का दान तो सीमित समय का है, लेकिन विद्या का दान अखंड है। आने वाले समय में देश के अन्य बड़े तीर्थ स्थलों पर भी इसी तर्ज पर गुरुकुल स्थापित करने की योजना है।

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