खुल गया बागेश्वर महाराज की फर्राटेदार अंग्रेजी स्पीच का राज, जिसे सुनकर चौंके विदेशी मेहमान...!

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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने देसी अंदाज और बुंदेली बोली के लिए जाने जाते हैं लेकिन हाल ही में धाम में आयोजित कन्या विवाह महोत्सव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रहा है।
इस वीडियो में महाराज मंच से बुंदेली नहीं, बल्कि अंग्रेजी में धारा प्रवाह स्पीच दे रहे हैं। विदेशी राजदूतों और मेहमानों के स्वागत में उनके शब्द और उच्चारण ख लोग दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। जो लोग महाराज को केवल एक साधारण कर्मकांडी ब्राह्मण समझते थे, उनके लिए यह वीडियो एक बड़ा सरप्राइज है। सबसे पहले देखिए आप वायरल वीडियो....
अब जानिए मजाक में खुद को 'अनपढ़' कहने वाले बागेश्वर महाराज की शिक्षा का सच
अक्सर कथाओं में मजाकिया लहजे में खुद को अंगूठा छाप या कम पढ़ा-लिखा' ताने वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री वास्तव में शिक्षित हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई ग्राम गढ़ा के ही सरकारी स्कूल में हुई। कक्षा 1 से 8वीं तक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, वे गंज के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुँचे। यहाँ उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई आर्ट्स (कला) विषय से पूरी की। इतना ही नहीं, उन्होंने संस्कृत विषय से बीए (Bachelor of Arts) की डिग्री भी हासिल की है। उनकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता इसी शैक्षणिक आधार और वैश्विक स्तर पर लोगों से जुड़ने के अनुभव का परिणाम है।
बिना ट्यूशन और बिना सुविधाओं के तय किया सफर
बागेश्वर महाराज की शिक्षा की सबसे रोचक बात यह है कि उन्होंने कभी किसी कोचिंग सेंटर का चेहरा नहीं देखा। भीषण आर्थिक तंगी और अभावों के बीच, उन्होंने बिना किसी प्राइवेट ट्यूशन के सरकारी स्कूलों के भरोसे अपनी पढ़ाई जारी रखी। जिस उम्र में बच्चे खेलकूद और सुख-सुविधाओं की मांग करते हैं, उस उम्र में धीरेंद्र शास्त्री स्कूल जाने के साथ-साथ कर्मकांड (पूजा-पाठ) कर अपने परिवार का खर्च भी चलाते थे। संघर्षों की इसी भट्टी में तपकर उन्होंने न केवल किताबी ज्ञान लिया, बल्कि जीवन के अनुभवों से भी खुद को समृद्ध किया।
चर्चा में क्यों है बागेश्वर महाराज की 'इंग्लिश'?
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है कि एक छोटे से गांव का युवा, जिसने अभावों में पढ़ाई की, वह इतने आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी कैसे बोल पा रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह उनकी बुद्धि और सीखने की ललक का परिणाम है। महाराज ने साबित कर दिया है कि भाषा केवल संवाद का एक माध्यम है, और अगर संकल्प दृढ़ हो, तो एक सरकारी स्कूल में पढ़ा हुआ व्यक्ति भी सात समंदर पार से आए मेहमानों से उन्हीं की भाषा में बात कर सकता है।


