मुंबई। क्या आप जानते हैं कि मशहूर गायक किशोर कुमार को एक साल के लिए ऑल इंडिया रेडियो पर बैन कर दिया गया था? जब इंदिरा गांधी की सरकार ने 1975-1977 के दौरान इमरजेंसी लगाई थी, तब किशोर कुमार के गानों को सरकारी ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) और दूरदर्शन पर प्रसारित करने से रोक दिया गया था।किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार से एक्टर और कॉमेडियन कपिल शर्मा ने उनके शो पर इस बारे में पूछा था। असल में क्या हुआ था, यह बताते हुए अमित कुमार ने कहा, "जब 1975 में इमरजेंसी लगी थी, तब किशोर कुमार एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर टॉप पर थे। उन्हें दिल्ली से एक कॉल आया। मिनिस्ट्री से किसी ने फोन किया और मेरे पिता ने फोन उठाया।"

उस व्यक्ति ने कहा, "किशोर साहब, हम आपका टिकट भेज रहे हैं। आप कल शाम की फ्लाइट से आ जाइए। परसों आपका एक शो है।"

हालांकि, किशोर कुमार ने उनसे कहा कि वे बात करने के लिए अपना कोई प्रतिनिधि भेजें। उन्होंने कहा, "तभी मैं आ पाऊंगा, वरना नहीं। अगर भगवान भी आकर मुझसे कहें, तो भी मैं नहीं आ पाऊंगा।"

मशहूर गायक के इस जवाब से अधिकारी बहुत नाराज हो गए और उन्होंने उन पर बैन लगाने की धमकी दी। अपनी बात पर कायम रहते हुए उस फोन कॉल के दो घंटे के अंदर ही किशोर कुमार पर बैन लगा दिया गया।

हालांकि, बैन के बावजूद किशोर कुमार की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा। लगभग एक साल बाद जब इमरजेंसी हटाई गई, तो उनके गाने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर फिर से बजने लगे। संगीत प्रेमी आज भी उनके गानों को बहुत पसंद करते हैं, जो उनके दिलों में एक खास जगह रखते हैं।

किशोर कुमार को गायन का पहला मौका संगीत निर्देशक खेमचंद प्रकाश से मिला, जिन्होंने उन्हें फिल्म 'जिद्दी (1948)' के लिए 'मरने की दुआएं क्यों मांगू' गाने का मौका दिया। उन्होंने 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'मेरे सपनों की रानी', 'ये शाम मस्तानी', 'ओ मेरे दिल के चैन', 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'पल पल दिल के पास' और 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे कई मशहूर गाने गाए।