नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को दिल्लीवासियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी समझते हुए दिवाली मनाएं। दिल्ली के सभी निवासियों को शुभकामनाएं देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा, "दीपावली प्रकाश, खुशी, सद्भाव और सकारात्मकता का त्योहार है। यह लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करता है और समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव के मूल्यों को मजबूत करता है।"

विधानसभा अध्यक्ष ने दिल्ली के लोगों से पर्यावरण संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दीपावली मनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए विजेंद्र गुप्ता ने नागरिकों से अपील की कि वे केवल 'ग्रीन पटाखों' का सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें और वायु तथा ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सचेत प्रयास करें।

विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि एक स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली का निर्माण करना केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया एक छोटा सा व्यक्तिगत प्रयास भी एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

विजेंद्र गुप्ता ने आगे कहा, "आइए, इस दीपावली को खुशियों के दीप जलाकर, अपने पर्यावरण की रक्षा करके और एक स्वच्छ, स्वस्थ तथा प्रदूषण मुक्त दिल्ली बनाने के लिए मिलकर काम करके मनाएं।"

इससे पहले, क्रांतिकारी और 'गदर पार्टी' के नेता भाई परमानंद (1876–1947) की आत्मकथा 'मेरी आपबीती: कालापानी की कारावास कहानी' के नए संस्करण को जारी करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा, "भाई परमानंद की आत्मकथा केवल सेलुलर जेल में सहे गए कष्टों का विवरण नहीं है, बल्कि यह उस देशभक्ति, बलिदान और अदम्य साहस की एक सशक्त याद दिलाती है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को आकार दिया।"

उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर जारी की गई यह पुस्तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 अक्टूबर को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इसका जिक्र किए जाने के कुछ दिनों बाद आई है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से इस किताब को पढ़ने की अपील की थी, ताकि वे भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को समझ सकें।

इस अवसर पर मौजूद इतिहासकारों, आर्य समाज के प्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों को संबोधित करते हुए, गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी देश की सामूहिक स्मृति को संजोए रखने के लिए, ऐसे ऐतिहासिक वृत्तांतों को नई पीढ़ियों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।

भाई परमानंद के असाधारण जीवन को याद करते हुए स्पीकर गुप्ता ने गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य, आर्य समाज के एक प्रभावशाली नेता और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक प्रमुख आवाज के रूप में उनके योगदान को रेखांकित किया।

1876 में झेलम जिले (जो अब पाकिस्तान में है) में जन्मे परमानंद को 1915 के पहले 'लाहौर षड्यंत्र मामले' में मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

उन्हें अंडमान द्वीप समूह की सेलुलर जेल भेज दिया गया, जहां उन्होंने लगभग पांच साल तक कैद काटी और राजनीतिक कैदियों के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार के विरोध में लंबी भूख हड़ताल की।

महात्मा गांधी ने 19 नवंबर, 1919 को 'यंग इंडिया' में लिखते हुए, उनके साथ हुए इस बर्ताव की निंदा की और उनकी रिहाई की मांग की। 20 अप्रैल, 1920 को रिहा होने के बाद, परमानंद ने लाहौर के नेशनल कॉलेज में इतिहास पढ़ाया, जहां क्रांतिकारी भगत सिंह और सुखदेव भी उनके छात्रों में शामिल थे।

स्पीकर गुप्ता ने कहा कि परमानंद जैसे क्रांतिकारियों के अनुभव, भारत की आजादी के पीछे छिपे कष्टों और व्यक्तिगत बलिदानों को समझने का एक महत्वपूर्ण नजरिया प्रदान करते हैं।