देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। राजनीतिक दलों की ओर से भी कमर कसी जा रही है। चंपावत जिले की विधानसभा सीटों की स्थिति का आकलन करने के लिए पिछले चुनाव परिणामों पर नजर डालने की जरूरत है। चंपावत जिले में विधानसभा की दो सीटें, लोहाघाट और चंपावत है।चंपावत: यह राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2022 के उपचुनाव में चंपावत से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2022 के आम चुनाव में यहां से भाजपा के कैलाश गहतोड़ी ने जीत दर्ज की थी। लेकिन खटीमा सीट से पुष्कर सिंह धामी के हार जाने के बाद कैलाश गहतोड़ी ने यह सीट उनके लिए खाली कर दी थी। उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी को 55,025 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। सीएम धामी को 58,258 वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं निर्मला गहतोड़ी को 3,233 वोट मिले थे।
चंपावत सीट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और उनके चेहरे के दम पर भाजपा इस सीट को अपना मजबूत गढ़ मानती है। अगर वे यहां से फिर से चुनाव लड़ते हैं तो यहां का मुकाबला काफी रोचक होगा। यहां के मतदाता जातिगत समीकरण, स्थानीय विकास कार्य, कानून-व्यवस्था और किसान मुद्दे हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
लोहाघाट: वर्ष 2012 और 2017 में लगातार दो बार जीतने के बाद भाजपा को 2022 के चुनाव में यहां हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीन ली थी, जिससे यहां का राजनीतिक समीकरण भी मौजूदा वक्त में काफी रोचक बना हुआ है। कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी ने भाजपा उम्मीदवार पूरन सिंह फर्त्याल को 6,038 वोटों से हराया था। खुशाल सिंह को 32,950 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे पूरन सिंह को 26,912 वोट मिले थे।
लोहाघाट विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति काफी अच्छी मानी जा रही है। हाल ही में यहां के कई क्षेत्रीय भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा की ओर से भी इस सीट को जीतने की पूरी कोशिश की जा रही है। पिछले चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा संगठन को मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों को भुनाने में लगी हुई है। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से भी मजबूती से तैयारी की जा रही है। ऐसे में अब देखना है कि इस बार यहां कांग्रेस अपनी जीत बरकरार रखने में सफल होती है या फिर भाजपा की वापसी होगी।














