नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में श्री राम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना को लेकर दिए गए बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भगवान कृष्ण के स्वरूप, उनके खड़े होने और 'टेढ़े' होने को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं ने उन्हें जमकर घेरा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "मानवीय भूलों के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ईशनिंदा के लिए कभी नहीं। ऐसे दुष्मुखी लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाना ही समाज के लिए श्रेयस्कर है। पूरे देश में इनके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं, नई अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक जीवन में हर सच्चा सनातनी इनका पूर्ण बहिष्कार करे, यही इनके अक्षम्य पाप का दंड होना चाहिए, नहीं तो वो भी ईशनिंदा के पाप का भागी बनकर अपना लोक-परलोक बिगाड़ लेगा।"
उन्होंने लिखा, "अगर दुर्भावना से भरा ऐसा व्यक्ति जीवन भर भी एकांतवास करके अपने किये का पश्चाताप और प्रायश्चित करेगा तो भी कोई भी धर्म प्रधान आस्थावान उसे माफ नहीं करेगा। मनुष्य का दंभ इतना भी नहीं होना चाहिए कि वो अपने को ईश्वर से ऊपर समझने लगे। वैधानिक कार्रवाई हो।"
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "यह बिल्कुल बेतुकी बात है। संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के बीच का संवाद, दरअसल, एक ही भगवान विष्णु के अलग-अलग स्वरूपों के प्रति भक्ति का संवाद था। एक अवतार ने वृंदावन के माधुर्य भाव का उत्सव मनाया, तो दूसरे ने अयोध्या की मर्यादा का। उनके बीच का यह विनोद कभी किसी को दूसरे से श्रेष्ठ बताने का माध्यम नहीं बना। यह दर्शाता था कि धनुष और बांसुरी एक ही दिव्य सत्ता के दो अभिन्न रूप हैं।"
उन्होंने कहा, "धीरेंद्र शास्त्री ने ब्रह्मांडीय और दिव्य लीलाओं को घटाकर उसे सामान्य कार्य बता दिया, जिसे कोई भी व्यक्ति कर सकता है। पवित्र त्रिभंगी मुद्रा को टेढ़ापन कहना, उसके गहन आध्यात्मिक सौंदर्य और भाव को छीन लेने जैसा है। महज सनसनी पैदा करने या अपनी बात को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने के लिए किसी पवित्र स्वरूप की गरिमा को कमतर नहीं किया जा सकता। कृपया ऐसी बेतुकी बातों का बचाव करना बंद कीजिए।"
राजद नेता तेजस्वी यादव ने लिखा, "लोक एकता की कनिष्ठ अंगुली से इंद्रासन को हिला देने वाले लोकनायक, धार्मिक सीमाओं से परे जन जन के पूज्य, हमारे कुलदेवता भगवान श्री कृष्ण पर सत्ता-पोषित एक मानसिक विक्षिप्त द्वारा की गई टिप्पणी अशोभनीय, अक्षम्य एवं अमर्यादित है।"
उन्होंने आगे लिखा, "राम और कृष्ण एक दूसरे के पूरक हैं। यह नफरती लोग पहले इंसान को बांटते थे, अब भगवान को बांटने लगे। राजनीतिक लोभ में और कितना नीचे गिरेंगे? लोक समता और सनातनी एकता को खंडित करने वाले इस शिखंडी के संरक्षक मोदी जी और तमाम भाजपा नेताओं को सामने आकर देश से, समाज से और सनातनियों से दंडवत होकर माफी मांगनी चाहिए।"
एम-टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने 'एक्स' पर लिखा, "भाजपा से सवाल है - आपका चहेता भगवान कृष्ण के बारे में ये सब बकवास कर रहा है। अगर कोई और ऐसा कहता, तो आपकी 'गैंग' ने हंगामा खड़ा कर दिया होता। अब खामोशी क्यों है? क्या आप अपने इन फर्जी बाबाओं को काबू में नहीं रख सकते?"
वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा, "कोई तो केमिकल लोचा है। इनकी जांच करवाना ठीक होगा। प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण में फर्क! अयोध्या और वृंदावन में फर्क! हिंदू-हिंदू करते करते अब यह ढोंगी बाबा हिंदुओं के आराध्य देवी देवताओं की खिल्ली उड़ाने लगा। कहां हो हिंदू धर्म के कायर ठेकेदारों? भावनाएं आहत नहीं हो रही हैं?'
बता दें कि बढ़ते विवाद को देखते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी भी मांगी है। करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए भगवान कृष्ण के स्वरूप को लेकर एक टिप्पणी की थी। उन्होंने कृष्ण के खड़े होने के अंदाज को 'टेढ़ा' बताया था। इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की भावनाएं आहत होने की बात कही गई और सियासी प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने एक वीडियो जारी किया और हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया, वह केवल विनोद और भाव यानी भक्ति रस में ऐसी बातें कह रहे थे और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।














