बालाघाट, रितेश सोनी। बैहर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। एंडेमिक जोन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उकवा में जर्जर भवन, मेडिकल स्टाफ की कमी, खराब इन्वर्टर बैटरी, टूटी पानी की टंकी, बंद वाटर फिल्टर और दवाइयों की कमी जैसी समस्याएं मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।


बताया गया कि बिजली गुल होने के दौरान यहां गर्भवती महिलाओं का प्रसव और मरीजों की जांच मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में करनी पड़ती है। स्वास्थ्य केंद्र में लगी इन्वर्टर बैटरियां वर्षों से खराब बताई जा रही हैं। बार-बार आवेदन और निवेदन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने का आरोप है। 24 घंटे प्रसव सुविधा वाले केंद्र में ऐसी स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी जर्जर स्थिति में है और बारिश के दौरान छत से पानी टपकने से मरीजों के बेड तक प्रभावित होने की बात सामने आई है। स्टाफ की कमी के कारण उपलब्ध कर्मचारियों को अस्पताल की सेवाओं के साथ फील्ड, वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य सर्वेक्षण जैसे कार्य भी संभालने पड़ रहे हैं। फार्मासिस्ट का स्थानांतरण होने के बाद ड्रेसर द्वारा दवा वितरण का काम किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।


केंद्र में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है। दवाओं की मांग भेजे जाने के बावजूद आपूर्ति नहीं होने की बात कही गई है। वहीं, पानी की टंकी खराब होने से वाटर फिल्टर भी बंद पड़ा है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पेयजल की समस्या बनी हुई है। संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं को मिलने वाली सहायता राशि भी लंबे समय से लंबित होने की बात सामने आई है।


बैहर-बिरसा के आदिवासी बहुल एंडेमिक क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीणों को बीमार बच्चों को बाइक से कई किलोमीटर का सफर तय कर निजी अस्पतालों अथवा जिला अस्पताल बालाघाट ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में जनमन योजना के तहत उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए CSR मद से मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 225 करोड़ रुपये के अतिरिक्त पैकेज की घोषणा की गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।


वहीं, बैहर विधायक संजय उइके ने पांच माह में संक्रामक बीमारी से 43 बैगा-आदिवासी बच्चों की मृत्यु का उल्लेख करते हुए मध्यप्रदेश सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी योजनाओं को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने 15 पात्र परिवारों को अभी तक सरकारी सहायता नहीं मिलने की बात भी कही है। ऐसे में सवाल है कि लगातार शिकायतों और आंदोलनों के बावजूद उकवा सहित बैहर के आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं कब पटरी पर आएंगी।