सागर। मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अफसर और सागर जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक (SP) अनुराग सुजानिया के अचानक इस्तीफा देने के बाद पुलिस प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। 2 नवंबर को पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस्तीफा सौंपने के बाद, मंगलवार (3 नवंबर) को उन्होंने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS Home) संजय कुमार शुक्ला से मुलाकात की और अपने फैसले की वजह साझा की। बुधवार को पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने सुजानिया का इस्तीफा गृह विभाग को प्रेषित कर दिया है, जहां से अंतिम निर्णय के लिए फाइल राज्य सरकार को भेजी जा रही है।


ACS होम से मुलाकात और इस्तीफे का कारण

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला से मुलाकात के दौरान आईपीएस अनुराग सुजानिया ने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों को मुख्य वजह बताया। प्रशासनिक गलियारों में अटकलें हैं कि सेवा से त्यागपत्र देने के बाद वे अपने परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो सकते हैं। हालांकि, इस्तीफे को लेकर सुजानिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले और आईपीएस लॉबी में एक काबिल अफसर माने जाने वाले अनुराग सुजानिया के अचानक नौकरी छोड़ने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


बंडा शराबकांड और लटकी कार्रवाई की गाज

सितंबर महीने में सागर जिले के बंडा में हुए भीषण शराबकांड (Banda Liquor Tragedy) में 35 से अधिक लोगों की असमय जान चली गई थी। इस त्रासदी के बाद तत्कालीन एसपी अनुराग सुजानिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। उस दौरान यह बात भी सामने आई थी कि जब सुजानिया मुरैना में एसपी थे, तब भी वहां शराबकांड की घटना हुई थी। हाल ही में हुए देवास शराबकांड के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए देवास और सागर दोनों जिलों के कलेक्टर व एसपी को पद से हटा दिया था। इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के महज एक सप्ताह के भीतर सुजानिया ने इस्तीफा दे दिया, जिसे सीधे तौर पर इस एक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।


फील्ड से हटाकर PHQ अटैच किए जाने से थे असंतुष्ट!

सागर एसपी के पद से हटाए जाने के बाद सरकार ने अनुराग सुजानिया को मैदान से हटाकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) भोपाल अटैच कर दिया था। माना जा रहा है कि लूप लाइन में भेजे जाने से उपजे असंतोष और बंडा कांड के बाद हुए प्रशासनिक फेरबदल के कारण ही उन्होंने यह कठोर कदम उठाया। अब देखना होगा कि राज्य सरकार उनके त्यागपत्र को स्वीकार करती है या कोई अन्य फैसला लेती है।