छतरपुर, विनोद मिश्रा। छतरपुर में कानून और सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए अवैध रूप से संचालित हो रहे गुटखा कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यातायात पुलिस को मिली पुख्ता मुखबिर की सूचना के आधार पर शहर से गुजर रही एक पिकअप गाड़ी को पकड़ा गया है, जिसमें भारी मात्रा में पान मसाला और 'लहर गुटखा' भरा हुआ था। जप्त किए गए वाहन का नंबर UP95AT4296 है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह माल छतरपुर के रास्ते मध्यप्रदेश के कई अन्य जिलों में सप्लाई किए जाने की फिराक में था। हालांकि, कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद बताए जा रहे कथित कारोबारी नवल साहू अपने सहयोगियों के साथ पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गए।
किराए के मकानों और गोदामों से चल रहा अवैध नेटवर्क, रेकी के साथ हो रही थी तस्करी
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आरोपी नवल साहू के खिलाफ पूर्व में भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में किराए के मकानों और गोदामों को ठिकाना बनाकर बड़े पैमाने पर गुटखा तैयार करने और उसका अवैध कारोबार संचालित करने का आरोप है। खास बात यह है कि तस्करी के इस खेल को सुरक्षित अंजाम देने के लिए पिकअप वाहन में माल को पूरी तरह ढककर ले जाया जा रहा था, और उसके आगे-आगे कुछ अन्य चार पहिया वाहन सुरक्षा व रेकी करते हुए चल रहे थे, ताकि किसी भी जांच से बचा जा सके।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके तिवारी की भूमिका और उनकी कार्रवाई पर कई तरह के सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो और चश्मदीदों के अनुसार, जब खाद्य अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, तब कथित आरोपी नवल साहू कथित तौर पर दस्तावेज के साथ नजर आ रहा था और वही कागजात अधिकारी के हाथ में भी दिखाई दे रहे थे। ऐसे में आम जनता और स्थानीय लोगों के मन में यह बड़ा सवाल है कि जब अधिकारी और आरोपी आमने-सामने थे, तब वह कथित कारोबारी वहां से फरार कैसे हो गया? हालांकि विभाग की ओर से संपर्क करने की कोशिश किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन कोई ठोस संपर्क न हो पाने का तर्क दिया जा रहा है।
जीएसटी चोरी और खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका
यह पूरा मामला केवल एक वाहन जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शहर में चल रहे बड़े अवैध कारोबार के नेटवर्क की पोल खुल गई है। यदि छतरपुर में इस तरह बड़े पैमाने पर गुटखा तैयार कर प्रदेश के विभिन्न जिलों में धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा था, तो इसकी भनक जिम्मेदार विभागों और खुफिया तंत्र को पहले क्यों नहीं लगी? इस पूरे कारोबार में भारी मात्रा में जीएसटी चोरी होने और आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए खाद्य सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाए जाने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
पूर्व के मामलों की फाइलों पर चुप्पी और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
गौरतलब है कि इससे पहले भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके तिवारी द्वारा गुटखा पकड़े जाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन उन मामलों की जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक या सामने नहीं आ पाई है। इसी ढुलमुल रवैये के चलते यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इस अवैध गुटखा कारोबार पर पूरी तरह लगाम कब लगेगी और इसके पीछे के असली नेटवर्क का पर्दाफाश कब होगा? अब शहरवासियों और जागरूक नागरिकों द्वारा जिला प्रशासन व पुलिस से यह सख्त मांग की जा रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि माल के स्रोत, सप्लाई चेन और कर चोरी में शामिल सभी चेहरों बेनकाब हो सकें।













