जबलपुर। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी) के क्षेत्राधिकार में कटौती और उसके बंटवारे का मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। वर्ष 2022 में किए गए विधायी संशोधन को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिका पर मंगलवार (15 सितंबर) को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) अल्पेश कोगजे और न्यायमूर्ति (जस्टिस) विवेक रूसिया की युगल पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
2022 के संशोधन और उज्जैन की धनवंतरी यूनिवर्सिटी पर उठाए गए सवाल
नागरिक पी. जी. नाजपांडे द्वारा दायर इस जनहित याचिका में अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने पैरवी की। याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित हैं: संशोधन के माध्यम से उज्जैन में नई 'धनवंतरी यूनिवर्सिटी' की स्थापना की गई, जिससे जबलपुर यूनिवर्सिटी का कार्यक्षेत्र काफी सीमित हो गया है। पूर्व में प्रदेश के सभी 10 संभाग जबलपुर यूनिवर्सिटी के अधीन थे, जिनमें से 6 संभाग अब नई यूनिवर्सिटी के क्षेत्राधिकार में चले गए हैं।
इसके कारण सम्बद्ध कॉलेजों की संख्या 80 से घटकर मात्र 14 रह गई है। याचिका में दावा किया गया है कि पूर्व में सम्बद्ध लगभग 1600 विद्यार्थियों में से 1400 विद्यार्थी अब उज्जैन यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आ गए हैं, जिससे जबलपुर में मात्र 200 के करीब छात्र ही शेष रह गए हैं। याचिकाकर्ता ने पुराने विश्वविद्यालय के 'रिजर्व फंड' को नई यूनिवर्सिटी को दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। तर्क दिया गया है कि नई यूनिवर्सिटी के लिए सरकार को अलग से वित्तीय बजट का प्रावधान करना चाहिए, न कि पुरानी यूनिवर्सिटी की जमा पूंजी का इस्तेमाल होना चाहिए।
हाईकोर्ट का रुख: प्रमुख सचिव समेत संबंधित विभागों को नोटिस जारी
याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की पीठ ने मामले को विचारणीय माना है: कोर्ट ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, विधि विभाग तथा विधायी कार्य विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायालय ने फिलहाल संशोधन पर रोक लगाने या उसे रद्द करने का अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। शासन और संबंधित विभागों का पक्ष प्रस्तुत होने के बाद मामले की अगली सुनवाई की जाएगी।




