ग्वालियर। धर्म और आस्था का छद्म रूप धारण कर मध्य प्रदेश के फर्जी पतों पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने वाले अंतरराष्ट्रीय बांग्लादेशी घुसपैठिए सिंडिकेट पर मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में गिरफ्तार 4 मुख्य आरोपियों से पूछताछ के बाद गायब हुए 66 बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश में एसटीएफ की 7 विशेष टीमें देश के 7 अलग-अलग राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं।
7 राज्यों में फैला नेटवर्क और डबरा के पते पर बने जाली पासपोर्ट
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के तार देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े हुए हैं: एसटीएफ की टीमें असम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर रही हैं। संदिग्धों के ठिकाने मुख्यतः बौद्ध मठों और विहारों के समीप पाए गए हैं।
मामले का भांडाफोड़ होते ही कई घुसपैठिए भूमिगत हो गए हैं, जबकि कुछ फर्जी भारतीय पासपोर्ट के सहारे थाईलैंड और अन्य देशों में फरार हो चुके हैं। मुख्य आरोपी रियाल चौधरी ने ग्वालियर जिले के डबरा स्थित सिमरिया गांव (वार्ड-1) के अंबेडकर पार्क और तथागत बुद्ध विहार के फर्जी पते पर 16 अन्य बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनवाए। इनमें टीटू रॉय, शुभा मुतशुद्धी, सुमन सरकार, प्रियांश रॉय, जॉय चौधरी, अमित चौधरी, सइकत चौधरी, विप्लव अधिकारी, डिगोन्तो अधिकारी, राजीव रॉय, अरित्रा रॉय, दीपक घोष, सूरज रॉय, लावुल रॉय, सुजीत रॉय और रॉकी रॉय शामिल हैं।
मास्टरमाइंड का खुलासा: बौद्ध भिक्षु के भेष में की थी घुसपैठ
एसटीएफ रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी रियाल चौधरी ने स्वीकार किया कि वह मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है: वह बौद्ध भिक्षु का भेष बनाकर अवैध रूप से भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। असम में रहने के दौरान स्थानीय संपर्कों के जरिए उसने मध्य प्रदेश के बैतूल से अपना पहला फर्जी पासपोर्ट बनवाया। इसके बाद उसने बांग्लादेश से अवैध रूप से लाए गए अन्य नागरिकों के जाली दस्तावेजों के आधार पर डबरा से पासपोर्ट जारी करवाए।
15 से अधिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर गिरेगी गाज
जांच में स्थानीय पुलिस, नगर निगम, नगर पालिका और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही और मिलीभगत उजागर हुई है: अधिकारियों-कर्मचारियों ने भौतिक सत्यापन किए बिना, एक ही मोबाइल नंबर और बंजर पहाड़ी के पते पर रिपोर्ट लगाकर सरकारी मुहर लगा दी। एसटीएफ भोपाल के एसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार, संलिप्त 15 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को चिह्नित कर लिया गया है और उनके खिलाफ जल्द ही आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।




