भोपाल। मध्य प्रदेश में मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से खिलवाड़ रोकने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक नई और डिजिटल रणनीति अपनाई है। अब विभाग ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स 'जोमैटो' (Zomato) और 'स्विगी' (Swiggy) के डेटा विश्लेषण के आधार पर तय कर रहा है कि किन प्रतिष्ठानों पर खाद्य सुरक्षा जांच (सैंपलिंग) आवश्यक है। देश में इस तरह का डेटा आधारित चेकिंग अभियान पहली बार आयोजित किया जा रहा है।


कस्टमर रिव्यू, रेटिंग्स और ऑर्डर वॉल्यूम बने जांच का आधार

पारंपरिक रूप से खाद्य सुरक्षा विभाग शिकायत मिलने या औचक निरीक्षण के आधार पर कार्रवाई करता था, लेकिन इस बार कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है: जोमैटो और स्विगी पर दर्ज ग्राहकों के रिव्यूज, रेटिंग्स और खाद्य पदार्थों के ऑर्डर वॉल्यूम (मात्रा) को आधार बनाकर जांच के लिए प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की गई है। अधिक बिक्री और उच्च ऑर्डर वॉल्यूम वाले बड़े प्रतिष्ठान पहले चिह्नित हो रहे हैं, जिससे विभाग का समय और श्रम दोनों बच रहा है।


राज्यभर के 400 बड़े प्रतिष्ठान रडार पर; फाइव स्टार होटलों से शुरुआत

इस अभियान के तहत प्रदेशभर के करीब 350 से 400 प्रतिष्ठित आउटलेट्स को चुना गया है: जांच रणनीति के तहत सबसे पहले फाइव स्टार होटलों को शामिल किया गया है। इसके पश्चात थ्री स्टार प्रॉपर्टीज और फिर सबसे ज्यादा ऑर्डर व भीड़ वाले रेस्तरां एवं ढाबों की जांच होगी। इंदौर के सभी फाइव स्टार होटलों की जांच पूरी कर ली गई है, जबकि भोपाल में यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर जिलों के प्रसिद्ध और अधिक बिक्री वाले फूड जॉइंट्स को भी जांच के दायरे में रखा गया है।


12 से 26 सितंबर तक चलेगा 14 दिवसीय विशेष राज्यव्यापी अभियान

खाद्य सुरक्षा विभाग का यह विशेष चेकिंग अभियान 12 सितंबर से प्रारंभ होकर 26 सितंबर 2026 तक निरंतर जारी रहेगा: भोपाल और इंदौर जैसे बड़े महानगरों में जांच के लिए चार से पांच विशेष उड़नदस्तों की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि गुणवत्ता मानकों में कोई ढील न दी जाए, लेकिन जांच प्रक्रिया के दौरान कारोबारियों के साथ व्यवहार पूरी तरह विनम्र रखा जाए।


एफडीए कंट्रोलर मनोज पुष्प का बयान: 'ट्रिकल-डाउन इफेक्ट' पर जोर

एफडीए (FDA) कंट्रोलर मनोज पुष्प ने बताया कि इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य विशुद्ध रूप से उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब बड़े और हाई-एंड (फाइव स्टार व थ्री स्टार) संस्थान खाद्य मानकों का कड़ाई से पालन करेंगे, तो उन्हें देखकर छोटे आउटलेट्स भी अपनी गुणवत्ता में सुधार करेंगे। इस 'ट्रिकल-डाउन इफेक्ट' (ऊपर से नीचे तक असर) की सोच के साथ ही इस पूरे डिजिटल अभियान को डिजाइन किया गया है।