नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के जंगलों में गणेश उत्सव के अवसर पर 7 दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। रिजर्व के कामती स्थित खरेर कैंप में जंगल गश्त में तैनात सभी हाथियों को लाया गया है। 14 से 20 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव के दौरान हाथियों से कोई काम नहीं लिया जाएगा। हाथियों को समर्पित इस 7 दिवसीय छुट्टी के दौरान वे केवल विश्राम करेंगे और उनके स्वास्थ्य, पोषण व कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पहले दिन पूजन, आरती और स्पा से हुई शुरुआत
महोत्सव के पहले दिन एसटीआर के अधिकारियों, कर्मचारियों और महावतों ने हाथियों की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी: महावतों ने हाथियों को नदी में घंटों स्नान कराया। नदी से बाहर निकालने के बाद उनके शरीर की अरंडी (कस्टर) के तेल से मालिश की गई और मांसपेशियों का स्पा (Spa) किया गया। कैंप में हथिनी पूजा, मारीसा, प्रिया तथा हाथी अंजूगम व गजा को शामिल किया गया है। सभी हाथियों के बैठने-खड़े होने का स्थान तय कर उनके नाम और विशेषताओं वाले सूचना बोर्ड लगाए गए हैं।
मल्टीग्रेन रोट, फल और गुड़ की विशेष डाइट
7 दिनों तक एसटीआर प्रशासन द्वारा हाथियों की विशेष मेहमाननवाजी की जाएगी: हाथियों को रोजाना भरपेट गन्ना, मक्का, नारियल, केला, ककड़ी, तरबूज और संतरे जैसे मौसमी फल खिलाए जा रहे हैं। हाथियों को सुबह-शाम विभिन्न अनाजों से बने पौष्टिक बड़े-बड़े रोट और गुड़ दिए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य परीक्षण और महावतों के लिए खेल प्रतियोगिताएं
जबलपुर की वन्यजीव स्वास्थ्य संस्था और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम द्वारा हाथियों का पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण, लंबाई-ऊंचाई का माप तथा दांतों की ट्रिमिंग की जाएगी। हाथियों के साथ मौजूद महावतों और चाराकटर्स का भी स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। उनके लिए खेल और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जबकि कैंप के अंतिम दिन कबड्डी और रस्साकशी जैसी स्पर्धाएं होंगी।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि इस 7 दिवसीय महोत्सव का मुख्य उद्देश्य वन प्रबंधन में अहम भूमिका निभाने वाले हाथियों को मानसिक और शारीरिक रूप से विश्राम देना तथा उनके स्वास्थ्य की व्यापक देखभाल सुनिश्चित करना है।




