छतरपुर, शिवेन्द्र शुक्ला। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय और शंखनाद नाट्य मंच छतरपुर के संयुक्त तत्वावधान में शहर के गांधी आश्रम में संचालित 25 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला का समापन मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी के लिखे नाटक एक था गधा उर्फ अलादाद खां के मंचन के साथ हुआ। गांधी आश्रम का मुक्ताकाशी मंच,विपरीत परिस्थितियां और भारी बारिश के बावजूद नाटक का मंचन शुरू हुआ और दर्शकों ने भी कलाकारों का जमकर हौसला बढ़ाया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के निदेशक संजय श्रीवास्तव की उपस्थिति ने कलाकारों के उत्साह को दोगुना कर दिया। विशिष्ट अतिथियों में गांधीवादी प्रेमनारायण मिश्रा,आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्याम गौतम, डॉ बहादुर सिंह परमार, डॉ संजय शर्मा, समाजसेवी शंकर सोनी सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
30 कलाकारों से सजी टीम ने मचाया धमाल
पिछले 25 दिनों से कार्यशाला में प्रशिक्षण ले रहे अभ्यर्थियों ने सवा घंटे के इस नाटक में जमकर धमाल मचाया। गीत संगीत से लबरेज इस नाटक में पात्रों के अभिनय, डायलॉग्स, वेशभूषा, मंच सज्जा, प्रॉपर्टी के साथ प्रकाश एवं ध्वनि प्रभाव ने चार चांद लगा दिए। प्रमुख भूमिकाओं में राजेश कुशवाहा, अनिल कुशवाहा, अभि तिवारी, अभिषेक गोस्वामी, मानवेंद्र सिंह, स्वाति विश्वकर्मा, शिल्पा रैकवार, अवनी अहिरवार, निशांत वाल्मीक, दीपचंद्र प्रजापति,आशीष पाल, अनन्या खरे, निष्ठा गुप्ता, अनुशिका चौरसिया आदि रहे तो वहीं संगीत संयोजन महेंद्र प्रताप तिवारी, मुकेश वर्मा, तन्मय सेन और राज राखेरिया का रहा। ध्वनि और विद्युत प्रभाव अभिदीप सुहाने का था। नाटक की प्रॉपर्टी, कॉस्ट्यूम डिजाइन में श्रुति चौरसिया, यश सोनी और नवदीप पाटकर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।रूसज्जा और सह निर्देशन लक्ष्य अरोड़ा का रहा और कार्यशाला संयोजन तथा निर्देशन शिवेन्द्र शुक्ला ने किया। 25 दिवसीय कार्यशाला में मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय से आए प्रशिक्षकों लक्ष्य अरोड़ा और गीता अहिरवार ने रंगमंच की बारीकियां सिखाईं।
यह थी नाटक की कहानी
नाटक में जुग्गन नामक पात्र का गधा गुजऱ जाता है और वह रोते हुए घूमता है। उसने गधे का नाम अलादाद रखा हुआ था। नाटक का नवाब एक सनकी शख्स है जिसे कोतवाल की एक सूचना से गलतफहमी हो जाती है कि अलादाद खां एक आदमी था। वह घोषणा करता है कि अलादाद खां के जनाज़े को वह खुद कंधा देगा जिससे जनता के बीच एक संवेदनशील नवाब की छवि बने। लेकिन जब बाद में पता चलता है कि जिसे वह कंधा देने वाला है वह आदमी नहीं एक गधा है तो वह कोतवाल को फांसी पर चढ़ाने का हुक्म देता है।अचानक परेशान कोतवाल की मुलाकात एक दुकान पर अलादाद खां नामक युवक से होती है। बस यहीं से नाटक का असली खेल शुरू होता है और फिर कहानी एक नया और मज़ेदार मोड़ लेती है।
अभ्यर्थियों को वितरित किए प्रमाण पत्र, अतिथियों का हुआ सम्मान
नाटक के समापन पर मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के निदेशक संजय श्रीवास्तव ने सभी अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया और शंखनाद नाट्य मंच की तरफ से कार्यशाला का चयन छतरपुर के लिए करने पर एक स्मृति चिह्न शंखनाद नाट्य मंच टीम की तरफ से अध्यक्ष अंजलि शुक्ला ने प्रदान किया।
इस मौके पर डॉ बहादुर सिंह परमार ने कहा कि नाटक का मंचन इतना प्रभावशाली था कि दर्शकों को पूरा मैसेज मिल गया अब कुछ कहने को बाकी नहीं है। शंकर सोनी ने कहा कि पिछले 26 सालों से शिवेन्द्र शुक्ला छतरपुर में रंगमंच की अलख जगाये हैं और उनके सानिध्य से कई कलाकार आज मुंबई में अपना मुकाम बना रहे हैं और अब एक नई पौध भी तैयार हो रही है जो रंगमंच को और समृद्ध करेगी। प्रेमनारायण मिश्रा ने कहा कि इस टीम के नाटक हमेशा प्रेरक और संदेश देने वाले होते हैं। भावपूर्ण अभिनय के लिए उन्होंने सभी की सराहना की। आजीविका मिशन के श्याम गौतम ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि इस तरह के प्रदर्शनों के दौरान मेरी उपस्थिति रहती है।छतरपुर में इतने उत्कृष्ट मचानों का श्रेय शंखनाद और उनकी पूरी टीम को जाता है।
नाट्य विद्यालय के निदेशक संजय श्रीवास्तव ने कहा कि मूसलाधार बारिश भी कलाकारों का हौसला नहीं डिगा पाई। रंगमंच यही सिखाता है कि शो मस्ट गो ऑन। आज इन कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन किया जिसके लिए वे साधुवाद के पात्र हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी दिनों में मध्यप्रदेश के सभी जिलों में इस तरह की कार्यशालाएं आयोजित होंगीं और रंग प्रयोग कार्यशाला के उत्कृष्ट नाटक भी देखने को मिलेंगे। कार्यक्रम में सहयोगी भूमिकाओं में गांधी आश्रम, सर्वेश खरे, मानस गुप्ता, आकाश मिश्रा, प्रद्युम्न सिंह रहे तो वहीं कार्यक्रम का संचालन नीरज खरे ने किया।




