मुंबई। फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा ने बुधवार को इंडिगो एयरलाइन की सेवा पर नाराजगी जाहिर की। वह दिल्ली से धर्मशाला जा रहे थे लेकिन धर्मशाला पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि उनका सामान दिल्ली में ही छूट गया है।सुधीर ने बताया कि उनके बैग में जरूरी सामान के साथ सभी दवाइयां भी थीं। बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि उनका सामान चंडीगढ़ के रास्ते शाम तक पहुंचा दिया जाएगा। इस घटना से निराश सुधीर ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी जाहिर करते हुए एयरलाइन की सेवा पर सवाल उठाए।

सुधीर मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा, ''मैं अगले कुछ दिनों के लिए धर्मशाला आया हूं। दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट से यहां पहुंचा। यहां आने पर मुझे बताया गया कि मेरा सामान दिल्ली में ही छूट गया है। अब मुझे बताया जा रहा है कि बुधवार शाम तक चंडीगढ़ के रास्ते मेरा सामान मुझ तक पहुंच जाएगा। मेरी सभी दवाइयां और जरूरी सामान उसी बैग में हैं।''

फिल्ममेकर ने आगे अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, ''यह बेहद निराशाजनक और परेशान करने वाला है।''

बता दें कि सुधीर मिश्रा हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1983 में आई कुंदन शाह की कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' से की थी। इस फिल्म में उन्होंने सहायक निर्देशक और पटकथा लेखक के तौर पर काम किया था। इसके बाद उन्होंने सईद अख्तर मिर्जा की फिल्म 'मोहन जोशी हाजिर हो!' और विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 'खामोश' में भी काम किया।

सुधीर ने 1987 में फिल्म 'ये वो मंजिल तो नहीं' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'मैं जिंदा हूं', 'धारावी', 'इस रात की सुबह नहीं', 'चमेली', 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी', 'खोया खोया चांद', 'ये साली जिंदगी' और 'इंकार' शामिल हैं।

सुधीर मिश्रा ने राहुल भट्ट और ऋचा चड्ढा की फिल्म 'दास देव' का लेखन और निर्देशन भी किया। इसके बाद उन्होंने इजरायली शो पर आधारित वेब सीरीज 'होस्टेजेस' का निर्देशन किया। उन्होंने मनु जोसेफ के पुरस्कार विजेता उपन्यास 'सीरियस मेन' पर आधारित फिल्म भी बनाई। इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुख्य भूमिका में नजर आए थे। इस फिल्म में अपने अभिनय के लिए नवाजुद्दीन को इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में नामांकन मिला था।