पन्ना, अमित सिंह राठौर। मध्य प्रदेश के सागर में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जल संसाधन विभाग के डिविजनल एकाउंटेंट (DA) और एक लिपिक को ₹45,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई मझगांय बांध नहर का बिल पास करने की एवज में की गई है, जिससे विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है।

चौथे और अंतिम बिल के एवज में मांगी जा रही थी रिश्वत

ग्वालियर के रहने वाले ठेकेदार गौरव तोमर जल संसाधन विभाग के अंतर्गत मझगांय बांध की नहर का निर्माण कार्य करा रहे थे। उनके तीन भुगतान पहले ही हो चुके थे, लेकिन चौथे और अंतिम बिल को पास करने के एवज में अधिकारी लगातार पैसों की मांग कर रहे थे। पिछले तीन महीनों से लगातार चक्कर काटने और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर ठेकेदार ने आखिरकार सागर लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।

योजनाबद्ध तरीके से लोकायुक्त टीम ने बिछाया जाल

शिकायतकर्ता ठेकेदार ने मीडिया को बताया कि अधिकारियों की मनमानी और अवैध मांग के कारण उन्हें अपना काम और साजो-सामान तक गिरवी रखना पड़ गया था। अधिकारी फोन पर बात करने से बचते थे और व्यक्तिगत रूप से मिलकर मनचाही रकम मांगते थे। तंग आकर उन्होंने कानून का सहारा लिया, जिसके बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर डिविजनल एकाउंटेंट दीपक परिहार को ₹15,000 और लिपिक अरविंद पाठक को ₹30,000 यानी कुल ₹45,000 की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज, विभाग में खौफ

लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सनसनीखेज छापे के बाद जल संसाधन विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में भी भारी खौफ का माहौल बना हुआ है। लोकायुक्त टीम अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।