महोबा। श्रीनगर से महोबा और कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग (Highway) पर यातायात पुलिस की चालानी कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि पूरे मार्ग पर कहीं भी गति सीमा (Speed Limit) के संकेतक या साइन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, इसके बावजूद पुलिस इंटरसेप्टर वाहन तैनात कर वाहन चालकों के बड़े-बड़े चालान काट रही है। नागरिकों ने इस कार्रवाई को नियम विरुद्ध और अवैध करार दिया है।
बिना साइन बोर्ड चालान पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमों के अनुसार किसी भी हाईवे या मुख्य मार्ग पर इंटरसेप्टर से चालानी कार्रवाई करने से पहले चालकों की जानकारी के लिए 'स्पीड लिमिट' के साइन बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य है: मार्ग पर कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि किस श्रेणी के वाहन की अधिकतम गति सीमा कितनी तय की गई है। चालकों का तर्क है कि जब गति सीमा की जानकारी प्रदर्शित ही नहीं की गई है, तो बिना पूर्व सूचना के इंटरसेप्टर से चालान काटना न्यायसंगत नहीं है।
छोटे मालवाहन मालिकों पर आर्थिक मार
शिकायत में छोटे व्यावसायिक और मालवाहक वाहनों के स्वामियों की आर्थिक लाचारी को प्रमुखता से उठाया गया है: छोटे वाहन मालिकों को हर महीने अपने वाहनों की बैंक किस्तें (EMIs) चुकानी पड़ती हैं। मौजूदा महंगाई के दौर में वे जैसे-तैसे अपने परिवार का पालन-पोषण और बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकाल पाते हैं। ऐसे स्थिति में बिना किसी चेतावनी या साइन बोर्ड के अचानक हजारों रुपये का भारी-भरकम चालान थमा दिए जाने से उनके सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई रोकने और राहत देने की मांग
स्थानीय नागरिकों और वाहन स्वामियों ने प्रशासनिक अधिकारियों व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से इस मामले पर तत्काल ध्यान देने की गुहार लगाई है। नागरिकों की मांग है कि जब तक हाईवे पर स्पष्ट और दृश्य योग्य 'स्पीड लिमिट' के बोर्ड स्थापित नहीं किए जाते, तब तक इंटरसेप्टर से चालानी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। यह प्रशासनिक शिकायत व अपील शिवम दीक्षित, रजनीश सोनी, आशीष, संदीप चतुर्वेदी सहित अन्य स्थानीय वाहन चालकों एवं नागरिकों द्वारा संयुक्त रूप से की गई है।
















