गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली एक अत्यंत विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक असहाय महिला अपने बीमार और दिव्यांग भाई को पीठ पर लादकर इलाज के लिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड भटकती नजर आ रही है। चेहरे पर बेबसी और आंखों में लाचारी लिए यह महिला अस्पताल के गलियारों में कभी इधर तो कभी उधर मदद की आस में चक्कर काटती रही, लेकिन उसे अस्पताल प्रबंधन की ओर से न तो कोई स्ट्रेचर मिला और न ही किसी स्वास्थ्यकर्मी ने सुध ली।
राघौगढ़ के बोरखेड़ी से इलाज कराने आई थी कृष्णाबाई, किसी ने नहीं की मदद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में दिख रही महिला का नाम कृष्णाबाई है, जो राघौगढ़ क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ी की निवासी है। कृष्णाबाई शनिवार को अपने छोटे भाई जगदीश को उपचार के लिए गुना जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी। जगदीश पिछले करीब एक वर्ष से गंभीर बीमारी से ग्रसित है और शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ है। पीड़िता ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद उसने भाई को भर्ती कराने के लिए स्ट्रेचर और कर्मचारियों से मदद मांगी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। भाई की बिगड़ती हालत और प्रशासनिक बेरुखी को देखकर मजबूर बहन ने जगदीश को अपनी पीठ पर उठाया और अस्पताल के भीतर दाखिल हो गई।
ISO सर्टिफाइड अस्पताल के दावों पर उठे सवाल
यह शर्मनाक वाकया ऐसे अस्पताल में सामने आया है, जिसे बेहतर प्रबंधन के नाम पर 'ISO सर्टिफिकेशन' मिला हुआ है। इतना ही नहीं, जिला अस्पताल में लगातार सामने आ रही डॉक्टरों की कमी, सुरक्षा और अव्यवस्थाओं की शिकायतों के चलते जिला प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने के लिए यहां दो डिप्टी कलेक्टरों की विशेष ड्यूटी भी लगा रखी है। इसके बावजूद एक बेबस बहन को अपने दिव्यांग भाई को पीठ पर लादकर ले जाना पड़ा, जिसने प्रशासनिक दावों और निगरानी तंत्र की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
CMHO बोले- 'स्ट्रेचर पर्याप्त हैं, तीमारदार जल्दबाजी में खुद उठा लेते हैं मरीज'
मामले का वीडियो वायरल होने और प्रशासनिक स्तर पर किरकिरी होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। मामले पर सफाई देते हुए गुना के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर ने कहा कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर उपलब्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि क्रिटिकल केयर ब्लॉक और पुराने अस्पताल भवन के पास स्ट्रेचर रखे गए हैं तथा मरीजों की सहायता के लिए वार्ड बॉय एवं मल्टी यूटिलिटी कर्मचारियों की नियमित तैनाती रहती है।
सीएमएचओ का तर्क है कि कई बार तीमारदार अधीर होकर या जल्दबाजी के चलते स्टाफ को सूचित किए बिना खुद ही मरीज को उठा लेते हैं। हालांकि, प्रबंधन की इस सफाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि अगर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद थीं, तो एक लाचार महिला को मदद के लिए गिड़गिड़ाने के बाद भाई को कंधे पर उठाने की नौबत क्यों आई।













