भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रभारी और पार्टी के कद्दावर रणनीतिकार दीपक बाबरिया का शनिवार, 10 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों, विशेषकर कांग्रेस संगठन में गहरा शोक छा गया है। दीपक बाबरिया का मध्य प्रदेश से बेहद करीबी और ऐतिहासिक नाता रहा है; राज्य की राजनीति में उनकी पहचान एक सख्त अनुशासक और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने वाले कुशल संगठक के रूप में रही है।
2018 के विधानसभा चुनाव में निभाई थी मुख्य रणनीतिकार की भूमिका
मध्य प्रदेश की राजनीति में दीपक बाबरिया का कार्यकाल सबसे निर्णायक माना जाता है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के रूप में कमान संभाली थी। 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की पटकथा तैयार करने में उनकी संगठन क्षमता का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह सहित तमाम गुटों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए टिकट वितरण और चुनावी रणनीति को धार दी थी।
संगठन में अनुशासन और जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देने के लिए जाने गए
मध्य प्रदेश प्रभारी रहते हुए बाबरिया ने प्रदेश के कोने-कोने का दौरा किया था। वे बंद कमरों की बैठकों के बजाय जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और अनुशासन लागू करने के लिए जाने जाते थे। उनके सख्त फैसलों और सांगठनिक फेरबदल ने उस दौर में पार्टी के कैडर में नई जान फूंक दी थी। मध्य प्रदेश के अलावा कांग्रेस आलाकमान ने उन पर लगातार भरोसा जताते हुए बाद में हरियाणा और दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी थी, जिसे उन्होंने जून 2023 से बखूबी संभाला।
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर
दीपक बाबरिया के निधन पर मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी नेताओं ने उनके निधन को संगठन के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस ने एक ऐसा मार्गदर्शक और संगठन शिल्पी खो दिया है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी कार्यकर्ताओं का मनोबल कभी गिरने नहीं दिया। पार्टी पदाधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।











