छतरपुर, संतोष शिवहरे। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा बंद होने के चलते एक गर्भवती महिला को जांच के लिए निजी सेंटर भेजे जाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि इलाज और जांच में हुई देरी के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार राजनगर थाना क्षेत्र के खजवा गांव निवासी आरती पटेल (40), पति ताई पटेल, को प्रसव पीड़ा और तबीयत बिगड़ने पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां डॉक्टरों ने महिला की जांच के बाद अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। परिजनों के मुताबिक जिला अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें बाहर निजी सेंटर से जांच कराने के लिए भेज दिया गया।
परिजन गंभीर हालत में आरती को जिला अस्पताल के बाहर स्थित सृष्टि अल्ट्रासाउंड सेंटर लेकर पहुंचे। बताया गया कि दोपहर करीब 2 बजे सोनोग्राफी की गई, लेकिन तब तक गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो चुकी थी। बच्चे की मौत की जानकारी मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यदि जिला अस्पताल में ही समय पर सोनोग्राफी और आवश्यक उपचार मिल जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।




