धमकी देकर कराई वारदात, चोरी की रकम से खरीदीं दो कार, बुलेट, आईफोन और घर का सामान, मामा के पास छिपाए 250 ग्राम सोने के जेवर भी बरामद
सागर, जीशान खान। पुराने पुश्तैनी मकान में रखा लाखों का सोना और नकदी अचानक गायब हुई तो परिवार के लिए यह सामान्य चोरी की वारदात थी, लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी कहीं ज्यादा गंभीर और चौंकाने वाली सामने आई। पुलिस के मुताबिक घर की जानकारी रखने वाले एक नाबालिग को पहले ब्लैकमेल किया गया और फिर जान से मारने की धमकी देकर उस पर ऐसा दबाव बनाया गया कि उसी के जरिए घर में रखी नकदी और सोने के जेवरात तक पहुंच बनाई गई।
चोरी के बाद करीब 13 लाख रुपये की नकदी को वाहनों, महंगे मोबाइल फोन और घरेलू सामान में बदल दिया गया, जबकि करीब 40 तोला सोना आरोपी ने अपने मामा के पास पहुंचा दिया। बीना पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 250 ग्राम सोने के जेवर और 16.37 लाख रुपये कीमत का अन्य सामान बरामद किया है। कुल बरामद मशरूका करीब 54.37 लाख रुपये का बताया गया है। मामला 17 जून 2026 को सामने आया, जब फरियादी परिवार ने अपने पुराने मकान में रखा सामान चेक किया।
परिवार अब नए मकान में रह रहा था, जबकि पुराने पुश्तैनी मकान में नकदी, सोने के आभूषण और दूसरी कीमती वस्तुएं सुरक्षित रखी थीं। सामान देखने पर नकदी और जेवर गायब मिले। इसके बाद थाना बीना में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल की जांच शुरू की। पहली चुनौती यह पता लगाना थी कि पुराने मकान में रखी संपत्ति की जानकारी आखिर किसे थी। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की, संदिग्धों की गतिविधियों की तस्दीक की और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को परिवार के ही नाबालिग से जुड़ी एक अहम कड़ी मिली।
पुलिस के अनुसार नाबालिग को ब्लैकमेल किया जा रहा था और उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। इसी डर का इस्तेमाल कर उससे घर में रखी संपत्ति के बारे में जानकारी ली गई और चोरी कराई गई। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आने के बाद जांच का फोकस आयुष मैना निवासी बीना पर गया। साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। आ
रोपी से पूछताछ में पुलिस के सामने चोरी की रकम और जेवरात के इस्तेमाल की तस्वीर साफ होने लगी। पुलिस के मुताबिक आयुष ने परिवार से करीब 13 लाख रुपये नकद और करीब 40 तोला सोने के आभूषण लिए थे। नकदी को लंबे समय तक छिपाकर रखने के बजाय अलग-अलग सामान खरीदने और अन्य खर्चों में इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने जब इन खरीदों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं तो चोरी की रकम से खरीदी गई संपत्ति तक पहुंच बन गई।
आयुष की निशानदेही पर पुलिस ने हुंडई वरना कार क्रमांक MP-04-CJ-9391, रॉयल इनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल और मारुति सुजुकी अर्टिगा कार क्रमांक MP-08-JE-9775 बरामद की। इसके अलावा आईफोन 17 प्रो मैक्स, आईफोन 15 और वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी मिला। पुलिस के मुताबिक बरामद सामान में हायर कंपनी का एसी, एलईडी टीवी, स्टेबलाइजर, दो साउंड बॉक्स, चार कुर्सियां, लकड़ी का बेड और लोहे का गेट भी शामिल हैं। मोटरसाइकिल से संबंधित कुछ सामग्री और दो बड़े चाकू भी बरामद किए गए हैं।
जांच की दूसरी बड़ी कड़ी चोरी के सोने तक पहुंचने की थी। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आयुष ने बताया कि चोरी के सोने के आभूषण उसने अपने मामा अंकुश बाल्मीक निवासी गुना को दिए थे। इसके बाद बीना पुलिस ने अंकुश को भी गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से करीब 250 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए।
इनमें करीब 70 ग्राम का हार, 30 ग्राम की चैन, 10 ग्राम का ब्रेसलेट, चार अंगूठियां, पेंडल, गोल गिन्नी, चार सोने के कड़े, मंगलसूत्र और एक अन्य सोने की चैन शामिल हैं। बरामद सोने की अनुमानित कीमत करीब 38 लाख रुपये बताई गई है। इस तरह पुलिस की अब तक की कार्रवाई में करीब 250 ग्राम सोने के जेवरात और 16.37 लाख रुपये कीमत का अन्य सामान बरामद हुआ है। दोनों की कुल अनुमानित कीमत करीब 54.37 लाख रुपये है। पुलिस का कहना है कि चोरी की पूरी रकम अभी बरामद नहीं हुई है।
आरोपी ने पूछताछ में नकदी से अलग-अलग सामान और वाहन खरीदने तथा कुछ राशि अन्य खर्चों में इस्तेमाल करने की जानकारी दी है। शेष रकम और संपत्ति की बरामदगी के लिए कार्रवाई जारी है। मामले में पुलिस ने आयुष मैना निवासी बीना और अंकुश बाल्मीक निवासी गुना को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की है। दोनों को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। वहीं प्रकरण से जुड़े सतीश अहिरवार निवासी शिवाजी वार्ड बीना और मोनू पाल निवासी गुना को न्यायालय के आदेश के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि वारदात में प्रत्येक आरोपी की भूमिका क्या थी और चोरी के बाद रकम व जेवरात को ठिकाने लगाने में किस-किस स्तर पर मदद मिली।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस के अनुसार वारदात में ताले या सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ने से ज्यादा नाबालिग के डर और उसकी मजबूरी का इस्तेमाल किया गया। आरोपी ने कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल कर घर की अंदरूनी जानकारी हासिल की और फिर उसी जानकारी के आधार पर लाखों की संपत्ति तक पहुंच बनाई। चोरी के बाद रकम को वाहनों और महंगे सामान में बदलना तथा सोने को दूसरे व्यक्ति के पास पहुंचा देना भी जांच में सामने आया है। पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना जयवीर सिंह भदौरिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र सोलंकी के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी बीना अजय कुमार सनकत के नेतृत्व में थाना बीना पुलिस ने यह कार्रवाई की।
मामले के खुलासे में निरीक्षक अनूप यादव, उपनिरीक्षक लखन राज, उपनिरीक्षक कस्तूरी अहिरवार, प्रधान आरक्षक विजय गौतम, राजेश पटेल, सौरभ रैकवार, आरक्षक संदीप यादव, दीप सिंह भदौरिया, बाबूलाल अहिरवार, राहुल सोलंकी, भूपेंद्र परिहार सहित पुलिस टीम की भूमिका रही। अब जांच का अगला सिरा उस रकम तक पहुंचने का है, जो अभी बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि चोरी के बाद खरीदी गई संपत्ति में कितनी रकम लगी और कितना पैसा अन्य खर्चों में गया। फिलहाल 54 लाख रुपये से ज्यादा की बरामदगी ने यह जरूर साफ कर दिया है कि बीना के इस मामले में चोरी के पीछे सिर्फ तत्काल पैसा हासिल करने की कोशिश नहीं थी, बल्कि चोरी की रकम को अलग-अलग संपत्तियों में बदलकर छिपाने की कोशिश भी की गई।




