मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अनुपालन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया और विदेशी निवेशकों की श्रेणियों के आधार पर रिव्यू की अवधि को एक साल से बढ़ाकर दो साल और तीन साल से बढ़ाकर आठ साल कर दिया। यह नए नियम एक दिसंबर, 2026 से लागू होंगे।नियामक की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अनुपालन को सरल बनाने की सेबी की निरंतर कोशिशों के तहत, मौजूदा नियामक ढांचे के अंतर्गत केवाईसी समीक्षा की समय-सीमा को तर्कसंगत बनाया जा रहा है।
वर्तमान में, लागू श्रेणी और अन्य मानदंडों के आधार पर, एफपीआई को सालाना या हर तीन साल में एक बार समय-समय पर केवाईसी की समीक्षा करानी होती है। संशोधित ढांचे में समय-सीमा को एक साल से बढ़ाकर दो साल, और तीन साल से बढ़ाकर आठ साल कर दिया गया है। स्वागत-एफआई एफपीआई के मामले में, केवाईसी समीक्षा की समय-सीमा 10 साल ही बनी रहेगी। इसके अलावा, जीएस-एफपीआई के लिए दी गई मौजूदा छूट भी पहले जैसी ही बनी रहेगी।
इसके अलावा, सेबी ने कहा कि पंजीकरण जारी रखने के समय पहले दी गई जानकारी में बदलाव के संबंध में अलग से पुष्टि लेने की प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य एक जैसी कई आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाना, बार-बार होने वाले अनुपालन को कम करना और एफपीआई पर अनुपालन के बोझ को हल्का करना है, जिससे व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा।
सर्कुलर में आगे कहा गया कि यह कदम सेबी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रक्रिया संबंधी और बार-बार होने वाली औपचारिकताओं को कम करना और एफपीआई के लिए एक सुगम, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नियामक माहौल प्रदान करना है। इस सर्कुलर के प्रावधान 01 दिसंबर, 2026 से लागू होंगे।

















