नई दिल्ली। क्रिकेटर सौरव गांगुली को 14.49 करोड़ के आर्बिट्रल अवॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गांगुली के पक्ष में दिए गए आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती देने वाली परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट की याचिका खारिज कर दी।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार किया।
यह विवाद साल 2003 के खिलाड़ी प्रतिनिधित्व समझौते से जुड़ा था, जिसके तहत परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट को गांगुली के व्यापारिक और प्रचार संबंधी अधिकारों के प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली थी।
परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट ने दलील दी थी कि कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से सौरव गांगुली की कमाई को भी राजस्व-साझाकरण समझौते में शामिल किया जाना चाहिए था। कंपनी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नकुल दीवान ने कहा कि समझौते में प्रमोशनल सर्विसेज से जुड़ी व्यापक शर्तें थीं और आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को सही तरीके से नहीं समझा।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट की तरफ से समझौते की व्याख्या पर सवाल उठाए और गांगुली के खिलाड़ी के रूप में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से जुड़ने और प्रमोशनल गतिविधियों के बीच अंतर पर भी ध्यान दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल और कलकत्ता हाईकोर्ट के समवर्ती निष्कर्षों में दखल देने से इनकार किया। आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने सौरव गांगुली के पक्ष में 14,49,91,000 रुपये का अवॉर्ड, 12 प्रतिशत ब्याज और 50 लाख लागत का आदेश दिया था।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना है कि लंबे तक अग्रीमेंट जारी रखने और सौरव गांगुली का प्रतिनिधित्व करने के बाद परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट टर्मिनेशनल के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकती थी। मामले की सुनवाई के लिए परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट की तरफ से सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान जबकि सौरव गांगुली की तरफ से सीनियर एडवोकेट गौरब बनर्जी कोर्ट में पेश हुए थे।













