नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को सुधाकर मल्ली को कार्यकारी निदेशक (इग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) नियुक्त किया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई है।आरबीआई ने बयान में कहा कि कार्यकारी निदेशक के पद पर पदोन्नति से पहले सुधाकर मल्ली विभागीय पर्यवेक्षण में मुख्य महाप्रबंधक-प्रभारी के रूप में कार्यरत थे।

नई भूमिका में सुधाकर मल्ली पर्यवेक्षण विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन (सुपरवाइजरी असेसमेंट) की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह विभाग बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं की निगरानी एवं पर्यवेक्षण संबंधी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आरबीआई के अनुसार, सुधाकर मल्ली एक करियर सेंट्रल बैंकर हैं और उनके पास लगभग तीन दशकों का अनुभव है। उन्होंने दो दशक से अधिक समय तक बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सहकारी बैंकों की निगरानी से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है।

इसके अलावा, उन्हें विदेशों में भी लगभग पांच वर्षों का पर्यवेक्षण संबंधी अनुभव है। उन्होंने आरबीआई के करेंसी मैनेजमेंट क्षेत्र में भी कार्य किया है, जिससे उन्हें केंद्रीय बैंकिंग के विभिन्न पहलुओं की व्यापक समझ हासिल हुई है।

शैक्षणिक रूप से सुधाकर मल्ली मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक डिग्रीधारक हैं। साथ ही वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स (सीएआईआईबी) के प्रमाणित एसोसिएट भी हैं।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में आरबीआई ने शीर्ष प्रबंधन स्तर पर कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। पिछले महीने केंद्रीय बैंक ने सुमन रे को कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया था। पदोन्नति से पहले वह महाराष्ट्र के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कार्यरत थे। वर्तमान में वे डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) और प्रिमाइसेस विभाग का दायित्व संभाल रहे हैं।

सुमन रे के पास भी रिजर्व बैंक में तीन दशक से अधिक का अनुभव है और उन्होंने करेंसी मैनेजमेंट, वित्तीय समावेशन, भुगतान एवं निपटान प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण तथा मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में कार्य किया है।

इससे पहले अगस्त में आरबीआई ने मोनीषा चक्रवर्ती को कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया था। वे वर्तमान में विदेशी मुद्रा विभाग (फॉरेन एक्सचेंज डिपार्टमेंट) और वित्तीय बाजार विनियमन विभाग (फाइनेंशियल मार्केट्स रेगुलेशन डिपार्टमेंट) का दायित्व संभाल रही हैं।

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की निगरानी में लंबे अनुभव वाले सुधाकर मल्ली की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय वित्तीय प्रणाली का आकार तेजी से बढ़ रहा है और नियामकीय निगरानी का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। उनकी विशेषज्ञता बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और जोखिम प्रबंधन को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।