दिल्ली। पंजाब से निर्वाचित राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को उच्च सदन में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान अपनी बात रखी। नीट (NEET) पेपर लीक मामले पर अपनी पूर्व चुप्पी की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि जब वे विपक्ष में थे, तब सवाल उठाना उनका काम था, लेकिन अब सत्ता पक्ष (ट्रेजरी बेंच) में होने के कारण उनकी भूमिका बदल गई है। अब उनका दायित्व केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि समस्या का समाधान देना है। उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या का पक्का इलाज लेकर आई है और इसीलिए वे आज इस विषय पर बोलने के लिए प्रस्तुत हुए हैं।
'आपका गुस्सा और दर्द जायज': नीट अभ्यर्थियों को दिया भरोसा
राघव चड्ढा ने सीधे नीट के अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के युवाओं का गुस्सा, उनकी भावना और दर्द पूरी तरह से जायज है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों ने अपनी बात रखी, तो प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक (गार्जियन) की तरह उनकी पीड़ा सुनी और पूरे सिस्टम को बदलने का फैसला लिया।
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:
त्वरित कार्रवाई: नीट धांधली की जांच को लटकाने के बजाय फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 75 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करा दी गई।
कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अगली बार से नीट की परीक्षा ओएमआर (OMR) शीट के बजाय कंप्यूटर बेस्ड (CBT) सिस्टम से आयोजित कराई जाएगी।
सख्त कानून: अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए ऐसा कड़ा ढांचा तैयार किया गया है, जिसके लागू होने के बाद कोई भी पेपर लीक की बात सोचने से भी डरेगा।
'पेपर लीक देश की क्रॉनिक डिजीज, पंजाब का दिया उदाहरण'
राघव चड्ढा ने जवाबदेही और नैतिकता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पेपर लीक को किसी राज्य, मंत्री या राजनीतिक दल के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक "पैन इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम" और "क्रॉनिक डिजीज" (गंभीर बीमारी) है।
अपनी बात के समर्थन में उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए बताया कि 19 जुलाई 2026 को पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए बड़े पैमाने पर लाइव नकल कराने का सिंडिकेट पकड़ा गया था, जो अभ्यर्थियों से 13-13 लाख रुपये तक वसूल रहा था।
दलों से ऊपर उठकर सहयोग की अपील
सांसद चड्ढा ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल या प्रदेश का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मतभेदों से ऊपर उठकर इस सख्त कानून का समर्थन करें, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा भारत की परीक्षा प्रणाली में पुनः बहाल हो सके।




