नई दिल्ली। भारत के तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स से 2030 तक अर्बन लॉजिस्टिक्स स्पेस की मांग 75 मिलियन स्क्वायर फीट तक बढ़ सकती है। इसे डार्क स्टोर और वेयरहाउस इन्फ्रास्ट्रक्चर से सहारा मिलेगा। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।सीबीआरई साउथ एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक के अंत तक इस सेक्टर को शहर के अंदर लगभग 42 मिलियन वर्ग फुट के 'डार्क स्टोर' और 33 मिलियन वर्ग फुट के 'मदर हब' की जरूरत होगी।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 'मदर हब' बड़े गोदाम होते हैं जो आमतौर पर शहर के बाहरी इलाकों में स्थित होते हैं। यहां सामान का स्टॉक रखा जाता है और 'हब-एंड-स्पोक' डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल के जरिए कई 'डार्क स्टोर' तक सामान पहुंचाया जाता है।

भारत का क्विक कॉमर्स इकोसिस्टम 2026 तक लगभग 7,800 डार्क स्टोर्स तक फैल गया है और वर्तमान में 100 से अधिक शहरों में लगभग 27 मिलियन वर्ग फुट लॉजिस्टिक्स स्पेस को कवर करता है।

हालांकि मौजूदा डार्क-स्टोर नेटवर्क का लगभग 65-70 प्रतिशत हिस्सा देश के शीर्ष आठ महानगरों में केंद्रित है, लेकिन ऑपरेटर अब टियर-II और टियर-III शहरों में भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक डार्क स्टोर्स की संख्या 12,000 से अधिक हो जाएगी।

इसमें यह भी बताया गया है कि 2021 से 2025 के बीच क्विक कॉमर्स से जुड़ी वेयरहाउसिंग की मांग में 81 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) दर्ज की गई। इस दौरान, भारत में कुल लॉजिस्टिक्स लीजिंग गतिविधियों में इसका हिस्सा लगभग 4-5 प्रतिशत रहा।

इसके अलावा, क्विक कॉमर्स से जुड़ी सालाना जगह की खपत 2024 में 3.1 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2025 में 4.3 मिलियन वर्ग फुट हो गई।

शहरों के हिसाब से देखें तो, दिल्ली-एनसीआर सबसे बड़ा मार्केट बनकर उभरा है। 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच, क्विक कॉमर्स वेयरहाउसिंग की कुल मांग में दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही। इसके बाद मुंबई (20 प्रतिशत) और बेंगलुरु (17 प्रतिशत) का स्थान रहा।

वहीं, हैदराबाद की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत और चेन्नई की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत रही।

सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका) अंशुमन मैगजीन ने कहा, "क्विक कॉमर्स भारत में उपभोग और शहरी लॉजिस्टिक्स के तालमेल को बदल रहा है, और इस बदलाव के केंद्र में रियल एस्टेट है।"

उन्होंने आगे कहा, "जैसे-जैसे ये प्लेटफॉर्म भारी पूंजी वाले विस्तार से हटकर एक अधिक व्यवस्थित विकास चक्र की ओर बढ़ रहे हैं, उनका ध्यान केवल स्टोर बढ़ाने से हटकर ऐसे फुलफिलमेंट नेटवर्क बनाने पर आ गया है जो सघन, कुशल और सही जगहों पर स्थित हों। इससे शहरों के भीतर और बाहरी इलाकों में रियल एस्टेट के बड़े अवसर पैदा होंगे।"

सीबीआरई का कहना है कि भविष्य में इस सेक्टर की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐसे फुलफिलमेंट एसेट (सुविधाएं) कितने तैयार किए जाते हैं जो नियमों के अनुरूप हों, रणनीतिक रूप से सही जगहों पर हों और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हों। ये एसेट महानगरों और उभरते शहरी बाजारों में बदलती परिचालन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होने चाहिए।