इंदौर। इंदौर के प्रतिष्ठित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के तक्षशिला परिसर में युवाओं के लिए एक विशेष संवाद कार्यक्रम ‘Gen-Z चर्चा’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए और उन्होंने युवाओं को जीवन में सफलता, सब्र और बदलती पीढ़ी के दौर में खुद को मजबूत बनाए रखने के गुण सिखाए।
बदलती पीढ़ी और सोच पर संवाद
युवाओं को संबोधित करते हुए इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि आज समाज में पारंपरिक जातिगत मतभेदों का दौर पीछे छूट रहा है।उन्होंने कहा कि अब लड़ाई राजपूत, ब्राह्मण या अन्य पारंपरिक जातियों की नहीं रही, बल्कि असली मुकाबला और सोच की लड़ाई Gen-Z (1990 के दशक के उत्तरार्ध से 2010 के दशक की शुरुआत में जन्मे युवा) और आने वाली नई पीढ़ी Gen-Alpha के बीच शुरू हो चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के युवाओं को केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीति, नीति-निर्माण और संवैधानिक व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से आगे आना चाहिए।
धोनी, सचिन और कोहली का उदाहरण: "जो टूटा नहीं, वही सफल हुआ"
कथावाचक उपाध्याय ने सफलता का मूल मंत्र देते हुए भारतीय क्रिकेट के तीन दिग्गजों—महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली की सफलता के उदाहरण दिए: उन्होंने बताया कि जीवन में कठिन और विपरीत परिस्थितियां हर किसी के सामने आती हैं। ये तीनों महान खिलाड़ी केवल प्रतिभा के बल पर ही नहीं, बल्कि इसलिए इतिहास रच पाए क्योंकि वे कठिन से कठिन समय में भी टूटे नहीं और क्रीज पर टिके रहे। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, मुश्किलों के दौरान धैर्य (सब्र) रखना और डटे रहना ही आपको मंजिल तक पहुंचाता है।
क्या रही युवाओं की प्रतिक्रिया?
कार्यक्रम में शामिल हुए विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस चर्चा को लेकर मिले-जुले और उत्साहजनक अनुभव साझा किए:
हर्षिता जायसवाल: उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का अनुभव काफी प्रेरणादायक था। उन्होंने इच्छा जताई कि यदि उन्हें सवाल पूछने का मौका मिलता, तो वे जानना चाहतीं कि आज के दौर में अध्यात्म (Spirituality) और पढ़ाई (Studies) के बीच संतुलन बनाकर दोनों क्षेत्रों में सफलता कैसे हासिल की जा सकती है।
गोविंद: उनका कहना था कि युवाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों और कॅरियर पर चर्चा होना बहुत अच्छी पहल है, लेकिन ऐसे संवादों में अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जुड़े सवालों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।
सृष्टि: उन्होंने बताया कि इंद्रेश उपाध्याय द्वारा मुश्किल वक्त में 'सब्र' (धैर्य) रखने और डटे रहने की कही गई बात उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित कर गई।
कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम ने DAVV के युवाओं को मानसिक मजबूती, सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।















