मुरैना, देवेन्द्र सिंह राजपूत। चंबल नदी से अवैध रेत खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य सुनील कुमार निमिए ने मुरैना में बैठक कर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पुलिस, वन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों से फीडबैक लिया। बैठक में अवैध खनन की निगरानी के लिए आधुनिक एआई टावर के उपयोग पर भी सुझाव दिए गए। समिति के सदस्य को 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी है, जिसके बाद मामले में आगे सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट पूर्व में चंबल नदी में अवैध रेत खनन पर चिंता जता चुका है और इसे जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बताया था। इसके बाद तीनों राज्यों की सरकारों ने निगरानी बढ़ाते हुए पुलिस, वन विभाग और खनिज विभाग की टीमों को कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के बाद खनन में कमी आई है, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करने की चुनौती अब भी बनी हुई है।
मुरैना में आज भी विभिन्न स्थानों पर चंबल की रेत पहुंचने की बात सामने आ रही है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने बताया कि पुलिस अधीक्षक, डीएफओ और अन्य संबंधित विभागों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। वैकल्पिक रेत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 40 लीज स्वीकृत की गई हैं, जिनमें छह लाख मीट्रिक टन से अधिक रेत का स्टॉक उपलब्ध बताया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि वैध स्रोतों से रेत की आपूर्ति बढ़ाकर अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।
श्योपुर में अवैध खनन को लेकर सवाल
भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में चंबल नदी से अवैध रेत खनन की समस्या लंबे समय से सामने आती रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भिंड और मुरैना में कुछ असर दिखाई देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन श्योपुर में अब भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी रहने के आरोप हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि अवैध रेत की आपूर्ति ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के अलावा अन्य माध्यमों से की जा रही है और कुछ सरकारी निर्माण कार्यों तक भी चंबल की रेत पहुंच रही है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अब सभी की नजरें 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली CEC की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत के अगले निर्देशों से यह स्पष्ट होगा कि चंबल नदी को अवैध खनन से बचाने के लिए तीनों राज्यों में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।














