प्रयागराज। प्रयागराज पहुंचे सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कैबिनेट बैठक से पहले राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग उठाई। साथ ही, उन्होंने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद करने की भी मांग की।योगी कैबिनेट की बैठक पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "चुनाव को देखते हुए योगी सरकार को बड़े फैसले लेने पड़ेंगे। पंचायत सहायक एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे थे, उन्हें सरकार ने भगा दिया। इसी तरह एएनएम, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी की बहनें भी संघर्ष कर रही हैं। अब चुनाव है तो योगी सरकार कुछ न कुछ तो वादा करेगी ही। इन वादों को भाजपा के नेता पूरा करेंगे या नहीं करेंगे, इस पर भी जनता को भरोसा नहीं है।"
चंद्रशेखर ने कहा, "सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में जनता के लिए कुछ खास नहीं किया। अब मतदाताओं को अपने खेमे में करने के लिए एक तरह से खरीदने की कोशिश सरकार कर रही है। हम तो इस बात पर भी खुश हैं कि जनता और कर्मचारियों का भला होना चाहिए। सरकार को कर्मचारियों की पुरानी पेंशन को भी बहाल कर देना चाहिए।"
साथ ही चंद्रशेखर ने एसआईआर और 'वोट फिक्सिंग' के आरोपों पर अखिलेश यादव के बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से रोक दिया जाना चाहिए और डिजिटल वोटर लिस्ट पर भी रोक लगनी चाहिए। मुजफ्फरनगर के मीरापुर का डेटा सबसे पहले मैंने ही सामने रखा था, जिसमें दिखा था कि कुछ लोगों के नाम पर 24 या यहां तक कि 40 वोट तक दर्ज थे। अगर एमएलसी चुनावों में ही वोटर लिस्ट में इतनी हेराफेरी और इतनी गड़बड़ियां हैं, तो फिर आप मुख्य चुनाव कैसे करवाएंगे?"
सांसद ने कहा, "अब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है कि सर्वसम्मति से एसआईआर को लेकर फैसले लिए गए थे। जबकि चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच मतभेद जगजाहिर है। एसआईआर के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अब शासन-प्रशासन लोगों पर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का दबाव बना रहा है, क्योंकि आयोग और सरकार की पोल खुल गई।"
सांसद चंद्रशेखर ने अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा, "अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि अपनी सरकार में पिछड़े वर्ग के लिए कौन से काम किए थे? बसपा सरकार में पूर्व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती थी। अखिलेश की सरकार के आते ही इस योजना को बंद कर दिया गया। पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम बनाकर पिछड़े वर्ग के लोगों को रोजगार के लिए लोन देने की योजना थी, जिसे भी सपा सरकार ने बंद कर दिया था। इसके साथ अखिलेश यादव ने दलितों के लिए भी कोई काम नहीं किया।"

















