भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे यूसीसी का गहन अध्ययन करें और प्रदेश में इसके क्रियान्वयन की तैयारी शुरू करें।


मध्य प्रदेश सरकार अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सक्रिय नजर आ रही है। डॉ. मोहन यादव के संकेत के बाद गृह विभाग ने इस दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक यूसीसी से संबंधित विधेयक तैयार करने की जिम्मेदारी गृह विभाग के पास ही है, जिसके चलते विभागीय स्तर पर प्रारंभिक काम शुरू हो चुका है।


सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर सकती है, जो यूसीसी के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इस कमेटी को करीब 6 महीने का समय दिया जा सकता है, ताकि तय समयसीमा में प्रदेश के लिए उपयुक्त प्रारूप तैयार किया जा सके।


बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश को इस दिशा में केंद्र से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिसके बाद राज्य सरकार ने अपनी तैयारी और तेज कर दी है। सरकार का उद्देश्य है कि अन्य राज्यों के अनुभवों और कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जो प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप हो।


इसी क्रम में गोवा के सिविल कोड का विशेष अध्ययन किया जा रहा है, जिसे देश में यूसीसी का एकमात्र उदाहरण माना जाता है। इसके अलावा असम और गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों को भी शामिल किया जाएगा, जहां इस विषय पर कार्य प्रारंभ हो चुका है या प्रक्रिया प्रगति पर है। सरकार इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार करेगी, जिसे बाद में मंत्रिमंडल के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा।


राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस कदम पर प्रदेश में चर्चा भी तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्य प्रदेश किस मॉडल को अपनाता है और यूसीसी को लागू करने की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।