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व्यापार समाचारपीएलआई स्कीम से 14 सेक्टर्स में आया 2.16 लाख करोड़ रुपए का निवेश, 14.39 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए

पीएलआई स्कीम से 14 सेक्टर्स में आया 2.16 लाख करोड़ रुपए का निवेश, 14.39 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए

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20 फ़रवरी 2026, 01:30 pm IST
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नई दिल्ली। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) स्कीम के तहत अब तक देश के 14 सेक्टर्स में 2.16 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इससे 14.39 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।


मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि अब तक (31 दिसंबर, 2025 तक) इस योजना में 14 क्षेत्रों से 836 आवेदन आए हैं और कुल 2.16 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।


बयान में आगे कहा कि पीएलआई स्कीम के तहत लगाए गए प्लांट्स की कुल बिक्री 20.41 लाख रुपए से अधिक रही है। इसमें से 8.3 लाख करोड़ रुपए का निर्यात किया गया है।


पीएलआई स्कीम के तहत सरकार ने अब तक 28,748 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया है।


सरकार ने बताया कि पीएलआई योजना ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम को मजबूत किया है जिससे देश मोबाइल फोन और आईटी हार्डवेयर उत्पादों जैसे लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। वित्त वर्ष 2020-21 से मोबाइल फोन के आयात में लगभग 77 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि घरेलू मांग का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब स्थानीय उत्पादन से पूरा हो रहा है।


इस योजना के तहत 191 थोक औषधियों का पहली बार घरेलू उत्पादन संभव हो पाया है जिससे लगभग 1,785 करोड़ रुपए के आयात की भरपाई हुई है और घरेलू मूल्यवर्धन बढ़कर 83.7 प्रतिशत हो गया है।


वहीं, पीएलआई के चलते दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों की बिक्री आधार वर्ष (वित्त वर्ष 2019-20) की तुलना में छह गुना से अधिक बढ़ गई है, जबकि निर्यात बढ़कर 21,033 करोड़ रुपए हो गया है। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बीएसएनएल द्वारा भारत की स्वदेशी एंड-टू-एंड 4जी प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन है जिससे भारत इस क्षमता वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है।


इसके अलाव, पीएलआई योजना को ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र और उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिए भी शुरू किया गया है।


वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि पीएलआई को 2020 में भारत के विनिर्माण आधार को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए एक महत्‍वपूर्ण सुधारात्‍मक पहल के रूप में शुरू किया गया था। यह योजना प्रदर्शन-आधारित वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से उत्पादन में वृद्धि को बढ़ावा देती है, जिससे उत्पादन का विस्तार, प्रौद्योगिकी को अपनाना और आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण संभव हुआ है।

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